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2017 से पहले किसान आत्महत्या करता था, भूख से मौतें होती थीं, नहीं मिलता था फसल का उचित दामः मुख्यमंत्री योगी

लखनऊ। विधान परिषद में सीएम योगी ने कृषि के क्षेत्र में अपनी सरकार की उपलब्धियां बताने के साथ-साथ पूर्व की सरकार की नाकामियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 2015-16 में केंद्र सरकार यूपी को 20 कृषि विज्ञान केंद्र देना चाहती थी, जिससे किसानों को सही तकनीक और समय पर बीज मिल सके। समाजवादी पार्टी की सरकार ने नहीं लिया। मुझे आश्चर्य होता था कि सपा नेता जो कभी प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं, पूछते थे कि ये कृषि विज्ञान केंद्र क्या होता है। पहले किसान आत्महत्या करता था, भूख से मौतें होती थीं। किसान को उसकी फसल का उचित दाम नहीं मिलता था। मंडी परिषद के बाहर विक्रय पर प्रतिबंध था। आज हम कृषि विकास की दर जो 2016-17 में 6.6 थी, अब 18.2 प्रतिशत हो चुकी है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान जिसे प्रधानमंत्री ने 2018 में प्रारंभ किया था, आज यूपी में दो करोड़ 60 लाख किसानों के खाते में 51 हजार 649 करोड़ की राशि सीधे भेजी जाती है।

सीएम ने यूपी में कृषि के महत्व के बारे में कहा कि देश की जीडीपी में यूपी के एग्रीकल्चर का योगदान 25 फीसदी है। देश की कुल कृषि योग्य भूमि में 11 प्रतिशत भूमि यूपी में है। देश का 20 प्रतिशत खाद्यान्न उत्पादन यूपी करता है। देश के फूड बास्केट के रूप में यूपी जाना जाता है। सबसे उर्वरा भूमि, सबसे अच्छा जलसंसाधन यूपी के पास है।

अन्नदाता की उन्नति के लिए गौ आधारित कृषि को दे रहे बढ़ावा

कैंसर, किडनी फेल होना, लिवर खराब होना एक बड़ी समस्या है। ये अत्यधिक फर्टीलाइजर के कारण होता था, आज गौ आधारित कृषि को बढ़ावा देने के लिए कार्य हो रहा है। गंगा तटवर्ती 27 जनपदों को प्रदेश के अंदर 85 हजार हेक्टेयर में इसको संचालित किया जा रहा है, इसके लिए टेस्टिंग लैब की स्थापना की गयी है। कृषि विज्ञान केंद्र में भी टेस्ट किया जा रहा है। सिंचाई की परियोजनाओं पर कार्य हो रहे हैं। सरयू नहर परियोजना 1972 में आई मगर पूरी नहीं हो पाई, जिसे 2021 में राष्ट्र को समर्पित किया गया। तमाम परियोजनाओं को पूरा करने के लिए बजट में प्रवधान किये गये हैं।

हमारी सरकार में खत्म हुआ बिचौलियों का काम

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2012-17 में प्रदेश में 94 लाख मीट्रिक टन गेहूं का क्रय किया गया, 12800 करो़ड़ का भुगतान किया गया। ये पैसा किसान के खाते में सीधे न जाकर बिचौलियों के माध्यम से गया। 2017 से लेकर 22 के बीच में 219 लाख मिट्रिक टन गेहूं खरीदा और 40159 करोड़ डीबीटी के माध्यम से पैसा भेजा गया। 2012-17 के बीच में 123 लाख मीट्रिक टन धान खरीद हुई, 17190 करोड़ रुपए धान का भुगतान एजेंट के माध्यम से किया गया। 2017 से 2022 के बीच 280 लाख मीट्रिक टन खरीद किया गया और 50420 करोड़ का भुगतान डीबीटी के माध्यम से किया गया। इसी प्रकार 22-23 में 1075330 किसानों से 64 लाख 64 हजार मीट्रिक टन धान का खरीद किया गया। 13192 करोड़ का भुगतान अन्नदाताओं के खाते में भेजा गया। पहले चीनी मिलें औने-पौने दामों में बेच दी गयी। पिछले 6 साल में हमने 1.98 लाख करोड़ से अधिक का गन्ना भुगतान करा चुके हैं। आज 119 चीनी मिले हैं, जिनमें से 100 चीनी मिलें 10 दिन में गन्ना मूल्यों का भुगतान कर रही हैं।

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BRIJESH SINGH
the authorBRIJESH SINGH