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नेपाल और बांग्लादेश में भी धूमधाम से मनाई जाती है महाशिवरात्रि

नई दिल्लि।  महाशिवरात्रि हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है, जो कि भगवान शिव का प्रमुख पर्व है। फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को शिवरात्रि पर्व मनाया जाता है। महादेव की विशेष कृपा वाले दिन महाशिवरात्रि के पर्व को नेपाल और बांग्लादेश में भी धूमधाम से मनाया जाता है। इन दोनों देशों में महाशिवरात्रि के पर्व को लेकर विशेष मान्यताएं भी हैं।

विश्व प्रसिद्ध पशुपति नाथ नेपाल  मन्दीर में महाशिवरात्रि

इस महापर्व को नेपाल में और खासकर काठमांडू के पशुपति नाथ मंदिर में व्यापक रूप से मनाया जाता है। महाशिवरात्रि के अवसर पर पशुपतिनाथ मन्दिर में भक्तजनों की खूब भीड़ लगती है। इस दैरान यहाँ सिर्फ लोकल के ही नहीं, बल्कि भारत समेत विश्व के विभिन्न स्थानों से जोगी और भक्तों का तांता लगा रहता है।

विवाहित व अविवाहित महिलाओं से जुड़ी परंपरा

माना जाता है कि सृष्टि के प्रारंभ में इसी दिन मध्यरात्रि भगवान शंकर का ब्रह्मा से रुद्र के रूप में अवतरण हुआ था। प्रलय की बेला में इसी दिन प्रदोष के समय भगवान शिव तांडव करते हुए ब्रह्मांड को तीसरे नेत्र की ज्वाला से समाप्त कर देते हैं इसीलिए इसे महाशिवरात्रि अथवा काल‍रात्रि कहा गया।

‘शिव’ यानि, जिनसे योग परंपरा की शुरुआत मानी जाती है उन्हें आदि (प्रथम) गुरु माना जाता है। इस परंपरा के अनुसार, इस रात को ग्रहों की स्थिति ऐसी होती है जिससे मानव प्रणाली में ऊर्जा की एक शक्तिशाली प्राकृतिक लहर बहती है।

इसे भौतिक और आध्यात्मिक रूप से लाभकारी माना जाता है इसलिए इस रात जागरण की सलाह भी दी गयी है जिसमें शास्त्रीय संगीत और नृत्य के विभिन्न रूप में प्रशिक्षित विभिन्न क्षेत्रों से कलाकारों पूरी रात प्रदर्शन करते हैं। शिवरात्रि को महिलाओं के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है। विवाहित महिलाएँ अपने पति के सुखी जीवन के लिए प्रार्थना करती हैं व अविवाहित महिलाएं भगवान शिव, जिन्हें आदर्श पति के रूप में माना जाता है जैसे पति के लिए प्रार्थना करती हैं।

बांग्लादेश में कौन और मनाते हैं महाशिवरात्रि

महादेव के सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों में प्रसिद्ध मंदिर हैं। पड़ोसी देश पाकिस्तान (Pakistan), बांग्लादेश (Bangladesh) और अफगानिस्तान (Afghanistan) में भगवान शिव के प्रसिद्ध मंदिर है। इन देशों में स्थित कई मंदिर तो इतने चमत्कारिक हैं कि वैज्ञानिक भी आज तक इनका रहस्य सुलझा नहीं पाए हैं। ऐसा ही एक प्राचीन और चमत्कारी शिव मंदिर बांग्लादेश में भी है

बांग्लादेश में भी महाशिवरात्रि का महापर्व मनाया जाता है। यहाँ रहने वाले हिंदुओ के द्वारा ये महापर्व मनाया जाता है। ये लोग भगवान शिव के दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करने की उम्मीद में व्रत भी रखते हैं। कई बांग्लादेशी हिंदू इस खास दिन पर चंद्रनाथ धाम (चिटगांव) भी जाते हैं। बांग्लादेशी हिंदुओं की मान्यता है कि इस दिन व्रत व पूजा करने वाले स्त्री/पुरुष को अच्छा पति या पत्नी मिलती है। इस वजह से ये पर्व यहाँ खासा प्रसिद्ध है।

चमत्कार के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध प्राचीन शिव मंदिर अग्निकुंड महादेव

बांग्लादेश में एक प्राचीन शिव मंदिर है, जो अपने चमत्कार के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। इस मंदिर में दूर-दूर से लोग दर्शन और पूजा करने के लिए आते हैं। इसकी एक वजह मंदिर के प्रति लोगों की आस्था है और दूसरा यहां की जलती ज्वाला। इस मंदिर का नाम अग्निकुंड महादेव (Agnikund Mahadev Temple) है।

– अग्निकुंड महादेव मंदिर बांग्लादेश के चिट्टागांव में स्थित है। यह मंदिर दुनिया के लिए आश्चर्य का केंद्र है। कहा जाता है यहां मंदिर में मौजूद अग्निकुंड में आग की ज्वाला सालों से जलती चली आ रही है।

– आज तक इसे कोई बुझा नहीं सका है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि अभी तक कोई भी पुरातत्वविद इस आग के स्रोत की खोज नहीं कर पाया है।

वैज्ञानिक भी आज तक इसके रहस्य के बारे में पता कर पाए

– दूर-दूर से लोग इस मंदिर में धधकती ज्वाला को देखने और शिव मंदिर के दर्शन के लिए आते हैं। इस ज्वाला के कारण ही इस मंदिर का नाम अग्निकुंड महादेव रखा गया है।

– इस दिव्य ज्वाला का स्रोत आज तक कोई पता नहीं कर पाया है। न ही इसमें ईंधन पड़ता है, फिर भी ज्वाला का अखंड रूप से जलना चमत्कार ही है। वैज्ञानिक भी आज तक इसके रहस्य के बारे में जान नहीं पाए हैं।

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BRIJESH SINGH
the authorBRIJESH SINGH