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चमकौर साहिब में CM भगवंत मान का हमला, बोले – “बरगाड़ी कांड और नशे की जिम्मेदारी लें सुखबीर बादल”

चमकौर साहिब। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बुधवार को चमकौर साहिब विधानसभा क्षेत्र में विभिन्न विकास परियोजनाओं को जनता को समर्पित करने के बाद आयोजित सभा में विपक्षी दलों, खासकर शिरोमणि अकाली दल पर तीखा हमला बोला। उन्होंने अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल को चुनौती दी कि वे झूठी उपलब्धियों का बखान करने के बजाय बरगाड़ी कांड और नशे से हुई हजारों युवाओं की मौतों की जिम्मेदारी स्वीकार करें।

मुख्यमंत्री मान ने कहा कि अकाली शासन के दौरान नशे के सौदागरों को राजनीतिक संरक्षण मिला, जिसके चलते पंजाब में नशे का जाल फैलता गया और युवाओं की पूरी पीढ़ी बर्बाद हुई। उन्होंने आरोप लगाया, “सत्ता में रहते हुए बादलों ने केवल अपना कारोबार बढ़ाया, जबकि पंजाब और इसकी जनता को उनके हाल पर छोड़ दिया। 2007 से 2017 तक का दौर पंजाब का सबसे काला समय था, जब परिवहन, केबल, रेत, नशा और अन्य माफियाओं का एकाधिकार कायम था।

मान ने कहा कि अकाली शासन के समय नशा तस्कर सरकारी वाहनों तक से नशा सप्लाई करते थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार उन “जरनैलों” पर कोई रहम नहीं करेगी जिन्होंने युवाओं को नशे की आग में झोंककर पीढ़ियां बर्बाद कीं। उन्होंने कहा कि जांच में यह भी सामने आया है कि नशे के कारोबार से कई नेताओं ने अपार संपत्ति अर्जित की और अब वे जेल में भी विशेष सुविधाओं की मांग कर रहे हैं।

विपक्षी दलों पर निशाना

मुख्यमंत्री ने कांग्रेस और भाजपा पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह हैरानी की बात है कि नाभा जेल में बंद एक पूर्व अकाली नेता का समर्थन करने के लिए कांग्रेस नेता चरणजीत सिंह चन्नी, प्रताप सिंह बाजवा, सुखपाल सिंह खैहरा और भाजपा नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह व रवनीत बिट्टू तक सामने आ गए। मान ने कहा कि इससे पारंपरिक दलों की मिलीभगत उजागर हुई है।

उन्होंने दोबारा चुनौती देते हुए कहा, “ये नेता साफ करें कि वे पंजाब के युवाओं को बरबाद करने वाले नशा तस्करों के पक्ष में हैं या खिलाफ। मान ने कहा कि पारंपरिक दलों ने सरकारी खजाने को लूटा, जिसके चलते जनता ने उन्हें सत्ता से बाहर कर दिया। उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, सुखबीर सिंह बादल, बिक्रम सिंह मजीठिया, चरणजीत चन्नी जैसे बड़े नेता तक चुनाव में पराजित हो चुके हैं और अब सत्ता में लौटने के लिए छटपटा रहे हैं

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BRIJESH SINGH
the authorBRIJESH SINGH