संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण आज, सोमवार से शुरू हो गया। दूसरे चरण के पहले दिन विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मिडिल ईस्ट के ताजा हालात पर राज्यसभा में जवाब दिया। विदेश मंत्री ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को लेकर सतर्क है और खाड़ी देशों में रहने वाले लगभग एक करोड़ भारतीयों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि वहां फंसे नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है।
ईरान-इजरायल संघर्ष पर बोलते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत ने इस हमले पर गहरी चिंता जताई है और संवाद तथा कूटनीति के जरिए इसका समाधान निकालने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि कल तक लगभग 67,000 भारतीय नागरिक इंटरनेशनल बॉर्डर पार कर चुके हैं और वेस्ट एशिया से लोगों को वापस लाने की पूरी कोशिश जारी है।
पश्चिम एशिया के हालात पर विदेश मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री लगातार घटनाक्रम पर नजर रख रहे हैं और संबंधित मंत्रालयों को निर्देश देकर जवाब देने में सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस समय लीडरशिप लेवल पर ईरान के साथ बातचीत करना मुश्किल है, लेकिन भारत की प्राथमिकता शांति और संवाद है। भारत ने हिंद महासागर में मौजूद ईरानी जहाजों में से एक को शरण दी, जिस पर ईरान के विदेश मंत्री ने भारत का आभार व्यक्त किया।
जयशंकर ने यह भी बताया कि 1 मार्च को कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी की बैठक हुई थी, जिसमें सभी संबंधित मंत्रालयों और विभागों को जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि युद्ध लगातार बढ़ रहा है, जिससे न केवल आस-पास के क्षेत्र बल्कि अन्य देशों को भी खतरा है और आर्थिक गतिविधियों पर गहरा असर पड़ रहा है। शांति और सुरक्षा पर असर डालने वाले किसी भी विकास को भारत गंभीरता से देख रहा है।




