पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने मंगलवार को चेतावनी देते हुए कहा कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौता देश के कृषि क्षेत्र के लिए तीन विवादित कृषि कानूनों से भी अधिक खतरनाक साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि जिन कृषि कानूनों के खिलाफ देश में ऐतिहासिक किसान आंदोलन हुआ था, उससे भी बड़ा खतरा यह समझौता पैदा कर सकता है।
पंजाब विधानसभा में कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां द्वारा पेश प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि भारी सब्सिडी वाले अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए भारतीय बाजार खोल दिया गया तो इसका सीधा नुकसान पंजाब समेत पूरे देश के किसानों को उठाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि ऐसे हालात में भारतीय किसानों के लिए अमेरिकी उत्पादों से प्रतिस्पर्धा करना बेहद मुश्किल हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रस्तावित समझौते के बारे में राज्य सरकारों से कोई सलाह नहीं ली गई है और न ही उन्हें इसकी जानकारी दी गई है। उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इस अहम समझौते को लेकर किसी भी राज्य से अब तक कोई परामर्श नहीं किया गया है।
समझौते के कृषि क्षेत्र पर संभावित प्रभावों को लेकर चिंता जताते हुए मान ने कहा कि डीडीजीएस और सोयाबीन तेल जैसे सस्ते फीड विकल्पों का आयात बढ़ने से मक्का और सोयाबीन की कीमतों में भारी गिरावट आ सकती है। इससे पंजाब में फसल विविधीकरण की कोशिशों को भी बड़ा झटका लग सकता है।
उन्होंने चेतावनी दी कि कुछ गैर-शुल्क (नॉन-टैरिफ) शर्तों में ढील देने से जीएमओ सामग्री के प्रवेश के साथ-साथ नए कीटों, फसल रोगों और खतरनाक खरपतवारों के फैलने का खतरा भी बढ़ सकता है। मुख्यमंत्री के मुताबिक यह स्थिति पंजाब के कृषि पारिस्थितिकी तंत्र के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है।
मान ने कहा कि अमेरिका की कृषि संरचना भारत से काफी अलग है। वहां विशाल खेत, भारी सरकारी सब्सिडी और बड़े पैमाने पर उत्पादन की व्यवस्था है, जिससे अमेरिकी उत्पादक कम कीमतों पर भी निर्यात कर सकते हैं। ऐसे में पंजाब के किसानों के लिए अमेरिकी कृषि उत्पादों से मुकाबला करना बेहद कठिन हो जाएगा।
उन्होंने बताया कि अमेरिका से पशुओं के चारे के लिए सोया फीड का बड़े पैमाने पर आयात होने की संभावना है। पंजाब में करीब 1.25 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में मक्का की खेती होती है और इस समझौते से मक्का और सोयाबीन दोनों फसलों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसी तरह अमेरिका से कपास के आयात से भी पंजाब के किसानों को नुकसान हो सकता है, जहां लगभग 2.5 लाख एकड़ में कपास की खेती होती है। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय बजट में कृषि के हिस्से में कमी को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पहले कृषि को केंद्रीय बजट का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा मिलता था, जो अब घटकर करीब 7 प्रतिशत रह गया है।
इसके अलावा उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ और पंजाब विश्वविद्यालय पर कब्जा करने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि कैप्टन अमरिंदर सिंह, सुनील जाखड़, मनप्रीत सिंह बादल, प्रताप सिंह बाजवा और रवनीत सिंह बिट्टू जैसे कई नेता पंजाब और पंजाबियों के साथ हो रहे कथित अन्याय पर चुप्पी साधे हुए हैं।




