लखनऊ: उत्तर प्रदेश के 3.73 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिल सकती है। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) ने जून 2026 के बिजली बिलों में लगाए गए 10 प्रतिशत फ्यूल सरचार्ज (ईंधन अधिभार) पर कड़ा रुख अपनाते हुए इसे प्रथम दृष्टया नियामकीय प्रावधानों के अनुरूप नहीं माना है। आयोग ने उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) से सात दिनों के भीतर विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है। यह मामला उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद द्वारा दायर जनहित एवं लोकमहत्व प्रत्यावेदन के बाद सामने आया। परिषद ने आरोप लगाया कि यूपीपीसीएल ने फ्यूल एंड पावर परचेज कॉस्ट एडजस्टमेंट (FPPCA) की गणना में मार्च 2026 की वास्तविक बिजली खरीद लागत के साथ लगभग 1400 करोड़ रुपये की पुरानी देनदारियों और बकाया दावों को भी जोड़ दिया, जो नियामकीय व्यवस्था और कानून के विपरीत है।
उपभोक्ताओं को राहत मिलने के बजाय बढ़ा दिया गया बोझ
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा के अनुसार, यदि एफपीपीसीए की गणना नियमानुसार की जाती तो जून 2026 में उपभोक्ताओं पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त भार डालने के बजाय बिजली दरों में लगभग 2 प्रतिशत की कमी होनी चाहिए थी। परिषद का दावा है कि आयोग द्वारा स्वीकृत बिजली खरीद लागत लगभग 4.94 रुपये प्रति यूनिट थी, जबकि यूपीपीसीएल ने इसे करीब 5.86 रुपये प्रति यूनिट दर्शाया। इससे उपभोक्ताओं पर लगभग 1610 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ गया।
आयोग ने उठाए गंभीर सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने कहा कि न्यायिक आदेशों, एनटीपीसी के बकाया भुगतान, केंद्रीय ट्रांसमिशन उपयोगिता शुल्क तथा अन्य ऐतिहासिक देनदारियों को वर्तमान एफपीपीएएस/एफपीपीसीए गणना में शामिल करने से उपभोक्ताओं पर अनावश्यक वित्तीय भार पड़ता है। आयोग ने स्पष्ट किया कि ऐसा तरीका न तो यूपीईआरसी एमवाईटी विनियम-2025 के विनियमन 16.1 के अनुरूप है और न ही उपभोक्ता संरक्षण के सिद्धांतों से मेल खाता है। आयोग की प्रारंभिक राय है कि पिछली अवधि की देनदारियों को वर्तमान अवधि की गणना में शामिल करना नियमों के विपरीत है।
यूपीपीसीएल से मांगा गया विस्तृत जवाब
आयोग ने यूपीपीसीएल को निर्देश दिया है कि वह सात दिनों के भीतर एफपीपीएएस की विस्तृत गणना, उसमें शामिल सभी मदों का विवरण, वर्तमान और पूर्व अवधि की बिजली खरीद लागत, ट्रांसमिशन शुल्क, एपीटीईएल के आदेशों के अनुपालन में किए गए भुगतानों का ब्यौरा तथा पुराने बकायों को शामिल करने का कानूनी आधार प्रस्तुत करे।
फरवरी में भी लगा था 10% फ्यूल सरचार्ज
अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि फरवरी 2026 में भी उपभोक्ताओं से 10 प्रतिशत फ्यूल सरचार्ज वसूला गया था, जिस पर आयोग पहले ही स्पष्टीकरण मांग चुका है और मामला अभी विचाराधीन है। ऐसे में जून 2026 में दोबारा 10 प्रतिशत अधिभार लागू करना उपभोक्ता हितों के खिलाफ है। उपभोक्ता परिषद ने मांग की है कि जून 2026 में लगाए गए 10 प्रतिशत अतिरिक्त फ्यूल सरचार्ज पर तत्काल रोक लगाई जाए, इसकी गणना में शामिल पुराने दावों की स्वतंत्र जांच कराई जाए और उपभोक्ताओं पर डाले गए अतिरिक्त वित्तीय भार को वापस लिया जाए।




