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राम मंदिर ट्रस्ट विवाद में राहुल-खरगे की एंट्री: PM मोदी को लिखी चिट्ठी, चंदे की जांच और हिसाब सार्वजनिक करने की मांग

नई दिल्ली/अयोध्या: अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा विवाद ने अब देश में एक बड़ा राजनीतिक और कानूनी रूप अख्तियार कर लिया है। मंदिर ट्रस्ट में कथित वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर कांग्रेस नेतृत्व ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पीएम मोदी को एक संयुक्त पत्र लिखकर मामले की स्वतंत्र जांच कराने और मंदिर के खातों को सार्वजनिक करने की मांग की है।

दूसरी तरफ, राम जन्मभूमि विवाद के मुख्य पक्षकार रहे निर्मोही अखाड़े ने भी ट्रस्ट के खिलाफ देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) का दरवाजा खटखटा दिया है, जिससे इस पूरे मामले में सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है।

“PM की चुप्पी अस्वीकार्य”: राहुल और खरगे का तीखा प्रहार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे गए पत्र में कांग्रेस नेताओं ने मंदिर के चढ़ावे में हुई कथित हेराफेरी पर गहरी चिंता व्यक्त की है। पत्र में लिखा गया है: “हम आपसे मांग करते हैं कि ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन, नकद, सोने और चांदी सहित सभी प्रकार के चढ़ावे के प्रबंधन की तत्काल प्रभाव से एक स्वतंत्र और विस्तृत जांच कराई जाए। इस जांच की रिपोर्ट और ट्रस्ट के पूरे खाते (Audit Accounts) देश की जनता के सामने सार्वजनिक किए जाने चाहिए, ताकि देश के हर रामभक्त को पता चल सके कि उनकी गाढ़ी कमाई के दान का इस्तेमाल कहां और कैसे हुआ है।”

नेताओं ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि आस्था के इस बड़े केंद्र में हो रहे कथित भ्रष्टाचार पर पीएम की चुप्पी स्वीकार करने योग्य नहीं है। उन्होंने ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं।

‘प्राइवेट’ नहीं ‘पब्लिक ट्रस्ट’ बने: निर्मोही अखाड़े की सुप्रीम कोर्ट में गुहार

राजनीतिक घमासान के बीच निर्मोही अखाड़े ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर केंद्र सरकार को नया निर्देश देने की मांग की है। महंत राजा रामचंद्रचार्य अतीत गुरु रघुनाथ दास के माध्यम से दाखिल इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि वर्तमान ट्रस्ट जनभावनाओं के विपरीत एक ‘निजी ट्रस्ट’ (Private Trust) की तरह काम कर रहा है।

निर्मोही अखाड़े की मुख्य मांगें:

  • मौजूदा ट्रस्ट का पुनर्गठन कर इसे पूरी तरह से ‘सार्वजनिक ट्रस्ट’ (Public Trust) का रूप दिया जाए।

  • यह कदम नवंबर 2019 के सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले की मूल भावना को बनाए रखने के लिए जरूरी है।

  • ट्रस्ट के निर्णयों और कार्यप्रणाली की निगरानी का जिम्मा ‘रामानंदी बैरागी संप्रदाय’ के संतों को सौंपा जाए।

20 जुलाई (कल) सुप्रीम कोर्ट में ‘महासुनवाई’

याद दिला दें कि साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या की विवादित जमीन पर राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ करते हुए केंद्र सरकार को ट्रस्ट बनाने की जिम्मेदारी दी थी। अब, मंदिर के चंदे और चढ़ावे में कथित धांधली की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग करने वाली कई अलग-अलग याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट कल यानी 20 जुलाई को अहम सुनवाई करने जा रहा है। निर्मोही अखाड़े की नई याचिका जुड़ने के बाद कोर्ट रूम में होने वाली इस बहस पर पूरे देश की निगाहें टिक गई हैं।

BRIJESH SINGH
the authorBRIJESH SINGH