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बामोर से बॉलीवुड तक: मनीष कुमार सोनी की ‘रंगबाज’ उड़ान न्यूज़ जर्नलिस्ट अंकित कुमार गोयल का मनीष कुमार सोनी के साथ एक्सक्लूसिव इंटरव्यू

(न्यूज़ जर्नलिस्ट अंकित कुमार गोयल)

भोपाल: मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के छोटे से कस्बे बामोर से निकलकर फिल्मी दुनिया में अपनी पहचान बनाने वाले अभिनेता मनीष कुमार सोनी की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। बैंक की नौकरी करते हुए कैमरे के सामने खड़े होने का जज्बा रखने वाले मनीष आज 30 से ज्यादा फिल्मों और वेब सीरीज का हिस्सा हैं। न्यूज़ जर्नलिस्ट अंकित कुमार गोयल ने उनसे उनके सफर, संघर्ष और सपनों पर खुलकर बात की।

मनीष कुमार सोनी का जन्म बामोर, मुरैना में एक साधारण परिवार में हुआ। बचपन से ही फिल्मों का शौक था, लेकिन जिम्मेदारियों के चलते बैंक में नौकरी शुरू की। मगर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। साल 2017 में भोपाल में फिल्म रंगबाज की शूटिंग चल रही थी। मनीष के मित्र करण राय उस फिल्म में हवलदार का रोल कर रहे थे। बस यहीं से कहानी ने मोड़ लिया।

मनीष की पत्नी आशा सोनी उनके हर कदम पर सबसे बड़ी ताकत बनीं। आज मनीष इंडियन 2, एक दूजे के वास्ते, आश्रम 3, पंचायत 4, स्वाइप क्राइम, वध 2,सतरंगी,साइकोसैयां,_जैसी चर्चित फिल्मों और सीरीज में काम कर चुके हैं। उनकी आने वाली फिल्में _हार्टबिट, जनादेश और हकदार हैं।

पेश है उनसे हुई खास बातचीत के कुछ अंश

अंकित कुमार गोयल: सोनी जी, आपकी अभिनय यात्रा की शुरुआत कैसे हुई और परिवार का कितना सहयोग मिला?
मनीष कुमार सोनी: अंकित जी, शुरुआत बिल्कुल फिल्मी थी। मेरा दोस्त करण राय पिज्ज़ा वर्ल्ड में काम करता था। एक रात उसने शूटिंग की फोटो स्टेटस पर डाली — पुलिस की वर्दी में। मैंने मजाक में फोन कर दिया, “भाई मुंबई चला गया क्या?” उसने बताया भोपाल में ही रंगबाज की शूटिंग है। मैंने हंसी में कहा “मेरे लिए भी देख लेना”। उसने सीरियसली ले लिया। बोला फोटो-वीडियो भेजो। रात 1 बजे कास्टिंग डायरेक्टर भूपेंद्र राजपूत जी का कॉल आया — “सुबह 8 बजे मिलो”। स्क्रीन टेस्ट हुआ और सीधा इंस्पेक्टर का रोल लॉक। बस वहीं से क्लैप हुआ। परिवार, खासकर पत्नी आशा ने कभी रोक नहीं लगाई। वो बोलीं “जाओ, उड़ो”।

अंकित कुमार गोयल: आपके करियर का सबसे बड़ा मोड़ कौन सा रहा?

मनीष कुमार सोनी: सावधान इंडिया F.I.R. मेरे लिए टर्निंग पॉइंट था। स्टार उत्सव के लिए बन रहे इस शो में मुझे लगातार 6 एपिसोड में कास्ट किया गया। हर बार अलग किरदार — कभी वकील, कभी पिता, कभी विलेन। उसी ने इंडस्ट्री को बताया कि ये लड़का वैरायटी कर सकता है।

अंकित कुमार गोयल: अब तक का सबसे बड़ा रोल किसे मानते हैं?

मनीष कुमार सोनी: जनादेश फिल्म में CM के PA प्रशांत कुमार का किरदार। प्रकाश झा साहब जैसे लीजेंड डायरेक्टर के साथ स्क्रीन शेयर करना अपने आप में प्राउड मोमेंट है। इतने बड़े नाम के साथ काम करना सीख भी है और जिम्मेदारी भी।

अंकित कुमार गोयल: सबसे मुश्किल शूटिंग अनुभव?

मनीष कुमार सोनी: आश्रम 3 में सरकारी वकील का रोल। पहले स्क्रिप्ट में हिंदी ज्यादा थी। शूट पर डायरेक्टर ने स्क्रिप्ट बदल दी। इंग्लिश के लीगल टर्म बहुत थे। मैं इंग्लिश में थोड़ा कमजोर हूँ। वो 2 दिन टेंशन वाले थे। फिर रातभर बैठकर हर शब्द का मतलब समझा, प्रैक्टिस की। टेक ओके हुआ तो डायरेक्टर ने पीठ थपथपाई। लगा — डर के आगे जीत है।

अंकित कुमार गोयल: कभी डर का सामना किया?

मनीष कुमार सोनी: बिल्कुल। नए एक्टर को पहला डर होता है — “कर पाऊंगा या नहीं?” कैमरा ऑन होते ही हाथ कांपते थे। पर धीरे-धीरे समझ आया कि कैमरा आपका दुश्मन नहीं दोस्त है। अब डर को अपना को-एक्टर बना लिया है। वो रहता है तो परफॉर्मेंस में सच्चाई आती है।

अंकित कुमार गोयल: करियर से मिली सबसे बड़ी सीख?

मनीष कुमार सोनी: बस एक — “काम करते रहो, रुकना नहीं है”। फिल्म लाइन में रोज काम नहीं मिलता। पर अगर आप ईमानदार हो तो एक दिन फोन जरूर बजता है।

अंकित कुमार गोयल: क्या कभी लक्ष्य बदले?

मनीष कुमार सोनी: लक्ष्य वही है — बड़ा और दमदार किरदार। पर रास्ता बदलता रहा। बैंक की नौकरी से एक्टिंग तक। हर फील्ड में मैंने एक्स्ट्रा देने की कोशिश की। अब इंतजार है उस “पल” का जब लीड में कोई ऐसा रोल करूं जो लोगों को सालों याद रहे।

अंकित कुमार गोयल: सबसे बड़ा सपोर्ट सिस्टम कौन है?

मनीष कुमार सोनी: मेरी जॉब। सच कहूं तो फिल्मों में लगातार काम नहीं मिलता। महीने में 5 दिन शूट है तो 25 दिन खाली। ऐसे में बैंक की नौकरी ने घर चलाया, हौसला दिया। वरना सिर्फ पैशन से पेट नहीं भरता। मेरी पत्नी आशा और मेरा जॉब — ये दो पिलर हैं।

अंकित कुमार गोयल: कभी खुद को साबित करने की जरूरत महसूस हुई?

मनीष कुमार सोनी: हाँ, पर दूसरों को नहीं, खुद को। शुरू में सुनने को मिला — “चेहरा हीरो वाला नहीं”, “आवाज़ में दम नहीं”। मैंने बहस नहीं की। एक 2 सीन का रोल मिला। उसके लिए 15 दिन किरदार की चाल, बोली, बैकस्टोरी पर काम किया। वो 2 सीन जब स्क्रीन पर आए तो अगले प्रोजेक्ट में पूरा ट्रैक मिला। मेरे लिए साबित करना मतलब है — जो काम मिले, उसे इतनी शिद्दत से करो कि अगली बार तुम्हारा नाम बिना ऑडिशन के जुबान पर आए।

अंकित कुमार गोयल: सबसे बड़ा प्रेरणा स्रोत?

मनीष कुमार सोनी: मेरे फादर। वो एक्टर नहीं थे। पापा पुरुषोत्तम दास सोनी, फादर की छोटी सी 50 साल पुरानी किराने की दुकान है ,और फादर शांत हो गए हैं,अब मदर चलाती हैं, रोज सुबह 5 बजे से रात्रि 11 बजे तक दुकान पर बैठते, वही शिकायतें। पर एक दिन “ऊब गया” नहीं कहा। वो कहते थे — “जिस दिन काम से बोर हो गए, समझो खत्म”। एक्टिंग भी वैसी ही है। ग्लैमर नहीं, निरंतरता ही सुपरस्टार बनाती है।

अंकित कुमार गोयल: आगे क्या हासिल करना चाहते हैं?

मनीष कुमार सोनी: मैं “स्टार” से ज्यादा “वर्सेटाइल” बनना चाहता हूँ। अगले 5 साल का टारगेट:
1. एक नेगेटिव रोल जो लोगों को हफ्तों परेशान करे — इरफान साहब के “हासिल” जैसा।
2. एक बायोपिक — किसी गुमनाम हीरो की, जो फेमस नहीं पर कहानी बड़ी है।
3. थिएटर में वापसी — कैमरा बहुत कुछ देता है, पर स्टेज हर 6 महीने में जमीन पर ले आता है।
कैसे? स्क्रिप्ट चुनने में लालची बनकर। पैसा-बैनर नहीं, सिर्फ ये देखकर कि क्या ये रोल रात को सोने नहीं देगा।

अंकित कुमार गोयल: एक अभिनेता की सबसे बड़ी चुनौती?

मनीष कुमार सोनी: टाइपकास्ट होना और खुद पर शक करना। एक कॉमेडी हिट तो सब कॉमेडी ही देंगे। इंडस्ट्री आपको डिब्बे में बंद करना चाहती है क्योंकि वो सेफ है। और तभी खुद पर शक आता है — “क्या मैं बस यही कर सकता हूँ?”
इसका तोड़ है — “ना” बोलना सीखो। मुझे 1 साल में 14 कॉमेडी स्क्रिप्ट मिलीं। 13 को ना कहा। घर बैठा, डर लगा। पर 14वीं थ्रिलर थी। वही टर्निंग पॉइंट बनी। रिस्क लो। भूखे रहो, पर बोरिंग मत बनो।

अंकित कुमार गोयल: फिल्ममेकर्स को क्या मैसेज देना चाहेंगे?

मनीष कुमार सोनी: बस एक रिक्वेस्ट — “टैलेंट को सर्वाइव करने दो, सरवाइव नहीं”। सेट पर स्पॉट बॉय, टेक्निशियन, मेकअप दादा 16 घंटे काम करते हैं, महीने के आखिर में पेमेंट के लिए चक्कर लगाते हैं।
1. टाइम की इज्जत करो — आपका 1 घंटा लेट, 200 लोगों के 200 घंटे बर्बाद करता है।
2. क्रेडिट दो — नाम पर्दे पर न आए, पर यूनिट में उस दादा को थैंक्यू तो बोल दो जिसने 4 बजे सुबह चाय पिलाई।
3. नए लोगों पर दांव लगाओ — हर बड़ा नाम कभी नया था। किसी ने भरोसा किया था। वो चेन मत तोड़ो।
सफलता अकेले की नहीं होती। कैमरे के पीछे खड़ा हर इंसान जब जीतता है, तभी सिनेमा जीतता है।

अंकित कुमार गोयल: मनीष जी, आपकी कहानी बामोर से लेकर मुंबई तक के हर सपने देखने वाले के लिए मिसाल है। शुक्रिया।
मनीष कुमार सोनी: शुक्रिया अंकित जी। बस यही कहूंगा — “सपना बड़ा रखो, पैर जमीन पर रखो। मंजिल मिल ही जाती है।”

बॉक्स: मनीष कुमार सोनी क्विक फैक्ट्स
होमटाउन: बामोर, मुरैना, म.प्र.
डेब्यू: रंगबाज – इंस्पेक्टर का रोल
चर्चित काम: इंडियन 2, आश्रम 3, पंचायत 4, स्वाइप क्राइम, वध 2, साइको सैयां,सतरंगी,
अपकमिंग: हार्टबीट, जनादेश, हकदार
मंत्र: “प्लान B मत रखो, वरना प्लान A कभी सक्सेस नहीं होगा”

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BRIJESH SINGH
the authorBRIJESH SINGH