हरिद्वार। जैसे-जैसे सावन का पावन मास निकट आता है, धर्मनगरी हरिद्वार की आध्यात्मिक धड़कन तेज़ होने लगती है। इस वर्ष भी हरिद्वार में शिवभक्ति का सबसे बड़ा आकर्षण निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज की विशेष शिव साधना और राष्ट्र कल्याण के लिए होने वाले वैदिक अनुष्ठान रहेंगे। देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, संतों और शिवभक्तों के उनके दर्शन एवं आशीर्वाद के लिए पहुंचने की संभावना है।
आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज लंबे समय से शिव उपासना, वैदिक परंपराओं और सनातन संस्कृति के संरक्षण के लिए समर्पित हैं। सावन के पूरे माह वे भगवान शिव की विशेष पूजा, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप और लोकमंगल के अनुष्ठानों में लीन रहते हैं। उनके सान्निध्य में होने वाले धार्मिक आयोजन श्रद्धालुओं के लिए गहरी आस्था और आध्यात्मिक अनुभव का विषय माने जाते हैं।
सावन के सोमवार, प्रदोष और अन्य शुभ अवसरों पर आश्रम में सुबह से ही श्रद्धालुओं की कतारें लग जाती हैं। उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब और देश के अनेक हिस्सों से भक्त हरिद्वार पहुंचते हैं। वैदिक मंत्रोच्चार, रुद्रपाठ और “हर-हर महादेव” के जयघोष से पूरा वातावरण शिवमय हो उठता है।
संत समाज का मानना है कि आज के समय में कठोर साधना, अनुशासन और लोककल्याण के संकल्प के साथ आध्यात्मिक जीवन जीने वाले संत समाज के लिए प्रेरणा हैं। स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज की साधना ने उन्हें देशभर के शिवभक्तों के बीच विशेष सम्मान दिलाया है। यही कारण है कि हर वर्ष सावन में उनके दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती जा रही है।
हरिद्वार का यह आध्यात्मिक आयोजन केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, वैदिक परंपरा और सनातन मूल्यों की जीवंत अभिव्यक्ति भी है। सावन के इस पावन अवसर पर एक बार फिर हरिद्वार शिवभक्ति के रंग में रंगा दिखाई देगा और आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज की साधना लाखों श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनेगी।
लेखक
शान्तनु शुक्ला
धार्मिक मामलों के विशेषज्ञ एवं वरिष्ठ पत्रकार




