जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में हुए आतंकी हमले को लेकर शुरुआती जांच में कई अहम बातें सामने आई हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, हमले में शामिल आतंकियों ने वारदात को अंजाम देने से पहले श्रमिकों का भरोसा जीतने की कोशिश की और फिर बेहद करीब से उन पर गोलियां चला दीं। इस हमले में छत्तीसगढ़ के दो प्रवासी मजदूरों की जान चली गई।
जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी, जिसकी पहचान लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकी लतीफ बट के रूप में की जा रही है, ईंट-भट्ठे पर काम करने वाले श्रमिकों के बीच कुछ समय तक बैठा रहा। इस दौरान उसने सामान्य बातचीत की, उनका परिचय पूछा और ऐसा व्यवहार किया जिससे किसी तरह का संदेह न हो। उसके पास मौजूद काले बैग में कथित तौर पर असॉल्ट राइफल छिपी हुई थी।
भरोसा दिलाया, फिर अचानक किया हमला
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, बातचीत के बाद आतंकी वहां से जाने लगा, लेकिन कुछ ही देर बाद उसने प्यास लगने की बात कही। जैसे ही एक श्रमिक की पत्नी उसके लिए पानी लेने अंदर गई, उसने मौके का फायदा उठाकर दोनों मजदूरों पर नजदीक से गोलियां चला दीं। हमला इतना अचानक था कि आसपास मौजूद लोग संभल भी नहीं सके।
वारदात के समय घटनास्थल पर एक छोटा बच्चा भी मौजूद था। गोलीबारी के बाद दोनों आतंकी मौके से फरार हो गए। सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू कर दिया है।
जांच एजेंसियां जुटा रहीं सबूत
अधिकारियों का कहना है कि घटना के हर पहलू की जांच की जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, घटनास्थल से मिले साक्ष्य और तकनीकी इनपुट के आधार पर आतंकियों की गतिविधियों की पड़ताल की जा रही है। प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि हमले से पहले आरोपियों ने जानबूझकर श्रमिकों का विश्वास हासिल करने की रणनीति अपनाई थी।
पहलगाम हमले से जोड़ी जा रही समानताएं
जांच एजेंसियां इस हमले की कार्यप्रणाली की तुलना पहले हुए पहलगाम आतंकी हमले से भी कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि हाल के हमलों में आम नागरिकों को निशाना बनाकर भय और असुरक्षा का माहौल पैदा करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, दोनों घटनाओं के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध को लेकर अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
उधर, मृतकों के परिजनों के लिए सहायता राशि की घोषणा की गई है, जबकि सुरक्षा एजेंसियां हमले में शामिल आतंकियों की तलाश में व्यापक अभियान चला रही हैं।




