चंडीगढ़: पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र का आज पांचवां दिन है। सदन की कार्यवाही के दौरान जमीन के रिकॉर्ड, सड़कों की मरम्मत, गांवों में जमीनों की तकसीम और अवैध खनन जैसे मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने अवैध खनन का मुद्दा उठाते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।
रिकॉर्ड विहीन जमीनों को लेकर उठी मांग
सदन में स्पीकर ने ऐसी जमीनों का मुद्दा उठाया, जिनका कहीं कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि कई जगह जमीनें न तो पंचायत के नाम दर्ज हैं और न ही उनका कोई स्पष्ट रिकॉर्ड है, जबकि स्थानीय लोग लंबे समय से इन जमीनों पर खेती कर रहे हैं। स्पीकर ने सुझाव दिया कि ऐसी जमीनों का मालिकाना हक उन लोगों के नाम किया जाना चाहिए, जो वास्तव में इन पर खेती कर रहे हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस मामले पर सरकार की ओर से विचार करने का आश्वासन दिया।
बारिश के बाद सड़कों की मरम्मत पर बोले सीएम मान
कई विधायकों ने राज्य में सड़कों की खराब स्थिति का मुद्दा भी सदन में उठाया। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि बारिश के दौरान सड़कों का काम प्रभावित होता है और ठंड के मौसम में भी निर्माण कार्य में परेशानी आती है। उन्होंने कहा कि सितंबर, अक्टूबर और दिसंबर तक सड़क निर्माण और मरम्मत के काम के लिए पर्याप्त समय रहता है। विभाग को सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना होगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सड़कों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले मैटेरियल की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
गांवों में जमीन की तकसीम का मुद्दा उठा
विधायक राणा इंदर प्रताप सिंह ने गांवों में जमीनों की तकसीम को लेकर आ रही समस्याओं का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि बैंक से लोन लेने के बाद कई मामलों में जमीन की तकसीम नहीं हो पाती, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने सरकार से इस संबंध में एक एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) जारी करने की मांग की, ताकि जमीनों की तकसीम से जुड़े मामलों का समाधान आसानी से हो सके।
परगट सिंह ने उठाया अभिव्यक्ति की आजादी और ड्रग्स का मुद्दा
कांग्रेस विधायक परगट सिंह ने सदन में पंजाब में विरोधियों की आवाज दबाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने की आजादी होनी चाहिए। परगट सिंह ने छोटे होटलों में पर्याप्त वेरिफिकेशन नहीं होने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे स्थानों पर ड्रग्स से जुड़ी गतिविधियां हो रही हैं। उन्होंने सरकार से इस दिशा में भी सख्त कार्रवाई करने की मांग की।
बाजवा ने अवैध खनन को लेकर सरकार को घेरा
नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने सदन में अवैध खनन का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। बाजवा ने कहा कि जल स्रोत मंत्री ने पहले दावा किया था कि राज्य में कहीं भी अवैध खनन नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच के लिए कमेटी बनाने की मांग की गई थी, लेकिन उनकी मांग पर ध्यान नहीं दिया गया। बाजवा ने कहा कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की ओर से खनन को लेकर आदेश जारी किए गए हैं, लेकिन उनका पालन नहीं हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि पठानकोट में बड़े स्तर पर खनन हो रहा है।
अधिकारी को लेकर भी लगाए गंभीर आरोप
बाजवा ने एक अधिकारी को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि एक मंत्री ने अपने क्षेत्र में बीडीपीओ की नियुक्ति की मांग की थी और इसके तीन दिन के भीतर संबंधित अधिकारी को प्रमोट कर दिया गया। बाजवा ने आरोप लगाया कि इसी अधिकारी ने मंत्री के कहने पर 92 एकड़ खनिज संपदा से भरपूर जमीन कथित तौर पर बेहद कम कीमत पर एक व्यक्ति को दे दी। उन्होंने कहा कि इसके बाद अधिकारी रिटायर हो गया। बाजवा ने बताया कि इस मामले को लेकर उन्होंने राज्यपाल को भी पत्र लिखा है। बाजवा के आरोपों के दौरान सदन में विरोध भी देखने को मिला। इसके बाद कांग्रेस के विधायक सदन के बीचोंबीच पहुंच गए और उन्होंने विरोध जताया।
ED की कार्रवाई का भी किया जिक्र
प्रताप सिंह बाजवा ने अवैध खनन से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि ईडी ने छापेमारी के बाद मंत्री के दो करीबियों को गिरफ्तार किया है। बाजवा के मुताबिक, दो क्रशरों के खिलाफ ईडी की कार्रवाई में अवैध खनन कर खनिज सामग्री बेचने की बात सामने आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में मंत्री की भूमिका का भी उल्लेख किया गया है और अवैध गतिविधियों से सरकार को राजस्व का नुकसान हुआ।
रावी के पास खनन को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ा
बाजवा ने दावा किया कि रात के समय भी अवैध खनन की गतिविधियां सामने आ रही हैं। उन्होंने हाई कोर्ट के एक मामले का हवाला देते हुए कहा कि रावी नदी के आसपास खनन को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सीमावर्ती इलाके में इस तरह की गतिविधियां कथित तौर पर तस्करी और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को बढ़ावा दे सकती हैं। इस मुद्दे को लेकर सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस तेज हो गई।




