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बीजेपी सांसद बृजलाल का ‘दिमागी नक्सल’ पर बड़ा बयान, बोले- जंगल के नक्सलियों से ज्यादा खतरनाक

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के पूर्व DGP और बीजेपी सांसद बृजलाल ने ‘दिमागी नक्सल’ यानी ‘इंटेलेक्चुअल नक्सल’ को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दावा किया कि ऐसे लोग जंगलों में हथियार लेकर सक्रिय नक्सलियों से भी ज्यादा खतरनाक हो सकते हैं। बृजलाल के मुताबिक, ये लोग शहरी इलाकों में रहकर अपनी विचारधारा के जरिए खासकर युवाओं को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं।

‘हथियार नहीं, विचारों का इस्तेमाल करते हैं’

बृजलाल ने कहा कि ‘दिमागी नक्सल’ जंगलों या दूरदराज के इलाकों में सक्रिय नहीं होते। वे हथियारों के बजाय अपनी बौद्धिक क्षमता और प्रभाव का इस्तेमाल करते हैं। उनके मुताबिक, ऐसे लोगों की मौजूदगी समाज के विभिन्न प्रभावशाली वर्गों में हो सकती है। उन्होंने दावा किया कि प्रोफेसर, शिक्षक, NGO से जुड़े लोग, लेखक, कवि और बुद्धिजीवी जैसे पेशों में शामिल कुछ लोग लेखों, सेमिनार और सम्मेलनों के जरिए अपनी विचारधारा को आगे बढ़ाते हैं।

‘लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भरोसा कमजोर करना मकसद

बीजेपी सांसद ने आरोप लगाया कि ऐसे समूहों का उद्देश्य लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति लोगों के विश्वास को कमजोर करना है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका, संविधान और सुरक्षा बलों को लेकर समाज में अविश्वास पैदा करने की कोशिश की जाती है। बृजलाल ने यह भी कहा कि युवाओं को प्रभावित कर उन्हें हिंसक गतिविधियों की ओर ले जाने का प्रयास किया जा सकता है। उन्होंने इसे लेकर समाज को सतर्क रहने की अपील की।

जागरूकता बढ़ाने की अपील

पूर्व DGP ने कहा कि शहरी इलाकों में ऐसी विचारधारा के प्रसार को रोकने के लिए लोगों को जागरूक और सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग नक्सली गतिविधियों का समर्थन करते हैं और कथित तौर पर उनके पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश करते हैं। बृजलाल के इस बयान के बाद ‘दिमागी नक्सल’ की परिभाषा और इसके इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज होने की संभावना है।

BRIJESH SINGH
the authorBRIJESH SINGH