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वाराणसी में फिर बढ़ने लगा गंगा का जलस्तर, 12 घंटे में 9 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी; घाटों पर बढ़ी परेशानी

वाराणसी: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में कुछ दिनों तक स्थिर रहने के बाद गंगा का जलस्तर एक बार फिर तेजी से बढ़ रहा है। केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, नदी का पानी करीब दो सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ऊपर जा रहा है। पिछले 12 घंटों में गंगा के जलस्तर में करीब 9 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। गुरुवार रात 8 बजे वाराणसी में गंगा का जलस्तर 69.31 मीटर दर्ज किया गया। हालांकि, यह अभी चेतावनी स्तर 70.262 मीटर से करीब एक मीटर नीचे है, लेकिन लगातार बढ़ते पानी ने प्रशासन के साथ-साथ घाटों पर रहने और कारोबार करने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

नाव संचालन पर रोक, कई घाट अब भी जलमग्न

गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण घाटों की स्थिति भी प्रभावित हुई है। कई छोटे घाट अभी भी पानी में डूबे हुए हैं। इसका सीधा असर नाविकों और घाटों पर दुकान लगाने वाले कारोबारियों पर पड़ रहा है। प्रशासन ने फिलहाल गंगा में नावों के संचालन पर पूरी तरह रोक लगा रखी है। वहीं, घाटों पर आने वाले श्रद्धालुओं को भी सीमित जगह के कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

श्रद्धालुओं को भी हो रही परेशानी

वाराणसी के नाविक शिवानंद साहनी ने बताया कि पानी बढ़ने के कारण घाटों पर दुकानदारों के लिए जगह कम हो गई है। तीर्थयात्रियों की संख्या के बीच जगह सीमित होने से भीड़ और अव्यवस्था की स्थिति बन रही है। उनके मुताबिक, स्नान और गंगा आरती के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। घाटों पर पानी भरने से कपड़े बदलने जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए उपलब्ध जगह भी कम हो गई है।

प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की

बढ़ती भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन ने श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। प्रशासन का कहना है कि भीड़ बढ़ने के साथ चोरी जैसी घटनाओं का खतरा भी बढ़ सकता है। लोगों से अपने सामान की निगरानी रखने और किसी संदिग्ध व्यक्ति या घटना की जानकारी तत्काल प्रशासन को देने की अपील की गई है।

फिलहाल गंगा का जलस्तर चेतावनी निशान से नीचे बना हुआ है, इसलिए तत्काल बड़े बाढ़ संकट की स्थिति नहीं है। हालांकि, अगर पानी इसी रफ्तार से लगातार बढ़ता रहा तो आने वाले दिनों में घाटों और आसपास के इलाकों में मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

 

BRIJESH SINGH
the authorBRIJESH SINGH