नोएडा के चर्चित निठारी कांड के दोषी रहे सुरेंद्र कोली की मौत के बाद एक बार फिर यह मामला चर्चा में है। उत्तराखंड के हरिद्वार में संदिग्ध परिस्थितियों में कोली का शव मिलने के बाद निठारी कांड के पीड़ित परिवारों ने कई सवाल उठाए हैं। परिवारों ने उसकी मौत को आत्महत्या मानने से इनकार करते हुए मामले की गहराई से जांच की मांग की है। पीड़ित परिवारों का आरोप है कि सुरेंद्र कोली निठारी कांड से जुड़े कई अहम राज जानता था और संभव है कि इन्हीं वजहों से उसकी हत्या की गई हो। हालांकि, इन आरोपों की अभी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।
ज्योति के माता-पिता ने उठाए सवाल
निठारी कांड के दौरान लापता हुई ज्योति के माता-पिता झब्बू लाल और सुनीता ने कोली की मौत पर संदेह जताया है। सुनीता का कहना है कि अदालत से बरी होने के बाद कोली सामान्य जीवन जी रहा था। ऐसे में अचानक उसके आत्महत्या करने की बात उन्हें समझ में नहीं आ रही है। परिवार का दावा है कि कोली को निठारी की डी-5 कोठी से जुड़े अपराधों और उनसे संबंधित कई महत्वपूर्ण जानकारियां थीं। सुनीता का आरोप है कि अगर वह इन मामलों से जुड़े किसी राज का खुलासा करने वाला था तो उसे रास्ते से हटाया जा सकता है।
मनिंदर सिंह पंढेर को लेकर भी लगाए आरोप
पीड़ित परिवार ने निठारी कांड के आरोपी रहे मनिंदर सिंह पंढेर का भी नाम लिया है। सुनीता ने आरोप लगाया कि कोली को मामले से जुड़े कई राज मालूम थे और हो सकता है कि वह किसी महत्वपूर्ण जानकारी को सामने लाने वाला था। सुनीता ने पंढेर पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके बच्चे की मौत के मामले में उन्हें अब तक न्याय नहीं मिला है। हालांकि, पंढेर के खिलाफ लगाए गए इन नए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
हरिद्वार में बदल ली थी पहचान
अदालत से फांसी की सजा से राहत मिलने के बाद सुरेंद्र कोली ने नोएडा छोड़ दिया था। वह उत्तराखंड के हरिद्वार में भूपतवाला इलाके में रह रहा था। बताया जा रहा है कि यहां वह अपनी पहचान छिपाकर चाय की दुकान चलाता था। इसी इलाके में उसका शव मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। फिलहाल मौत की वजह को लेकर आधिकारिक तौर पर अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। पोस्टमार्टम और फोरेंसिक जांच की रिपोर्ट से मौत की परिस्थितियों की तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।
2006 में सामने आया था निठारी कांड
निठारी कांड दिसंबर 2006 में सामने आया था। नोएडा के सेक्टर-31 स्थित निठारी गांव के पास डी-5 कोठी के आसपास मानव अवशेष मिलने के बाद पूरे देश में सनसनी फैल गई थी। यह कोठी कारोबारी मनिंदर सिंह पंढेर की थी, जहां सुरेंद्र कोली घरेलू सहायक के तौर पर काम करता था। मामले की जांच आगे बढ़ने पर कई बच्चों और महिलाओं के लापता होने से जुड़ी जानकारियां सामने आईं। बाद में सीबीआई ने इस मामले की जांच अपने हाथ में ली थी।
कई मामलों में सुनाई गई थी फांसी की सजा
जांच के दौरान सुरेंद्र कोली और मनिंदर सिंह पंढेर पर अलग-अलग मामलों में मुकदमे चले। निचली अदालतों ने कोली को कई मामलों में दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई थी। हालांकि, बाद की न्यायिक प्रक्रिया में कई मामलों में साक्ष्यों को लेकर सवाल उठे और उच्च अदालतों ने कोली को बरी कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने भी कई मामलों में उसे राहत दी थी। इसके बाद वह हरिद्वार में रह रहा था। अब उसकी मौत के बाद निठारी कांड से जुड़े पीड़ित परिवार एक बार फिर जांच की मांग कर रहे हैं। पुलिस की जांच, पोस्टमार्टम और फोरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सुरेंद्र कोली की मौत किन परिस्थितियों में हुई।




