पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले नशा, अपराध और भ्रष्टाचार के साथ सरकारी कर्मचारियों के बकाया महंगाई भत्ते (DA) का मुद्दा भी सियासी रंग पकड़ता नजर आ रहा है। विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर सरकार पर लगातार दबाव बना रहे हैं और कर्मचारियों के हितैषी होने का दावा कर रहे हैं। वहीं, भगवंत मान सरकार की कोशिश है कि चुनाव से पहले DA के बकाये से जुड़े विवाद को किसी तरह सुलझाकर कर्मचारियों को राहत दी जाए।
साढ़े सात लाख से ज्यादा कर्मचारियों-पेंशनरों पर असर
पंजाब में करीब 3.25 लाख सरकारी कर्मचारी और 4 लाख पेंशनर हैं। सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों का DA विवाद वर्ष 2016 से चले आ रहे बकाये से जुड़ा है। छठे वेतन आयोग के तहत सरकार पर करीब 14,191 करोड़ रुपये की देनदारी थी। सरकार ने फरवरी 2025 में इस बकाये के भुगतान के लिए पांच वित्तीय वर्षों का लिक्विडेशन प्लान तैयार किया था। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के मुताबिक, इस योजना के तहत सरकार करीब 4,500 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुकी है। हालांकि, अभी भी करीब 9,691 करोड़ रुपये बकाया हैं।
DA की किस्तों को लेकर भी विवाद
विवाद सिर्फ पुराने बकाये तक सीमित नहीं है। 1 जुलाई 2021 के बाद की DA/DR यानी महंगाई भत्ता और महंगाई राहत की किस्तों को लेकर भी कर्मचारियों और सरकार के बीच मामला चल रहा है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इसी साल 3 अगस्त को सरकार के लिक्विडेशन प्लान को खारिज करते हुए पूरा बकाया 15 दिन के भीतर चुकाने का आदेश दिया था। कोर्ट ने देरी होने की स्थिति में 6 प्रतिशत ब्याज देने और गैर-जरूरी सरकारी खर्चों पर रोक लगाने का भी निर्देश दिया था। हालांकि, पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दायर की है। सरकार का कहना है कि हाईकोर्ट के निर्देशों के मुताबिक तत्काल पूरा भुगतान करना वित्तीय और कानूनी रूप से संभव नहीं है।
चुनाव में बड़ा असर डाल सकता है मुद्दा
DA का यह विवाद आगामी विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के लिए चुनौती बन सकता है। राजनीतिक मामलों के जानकार हरबंस सिंह के मुताबिक, यह मुद्दा सीधे करीब सवा सात लाख कर्मचारियों और पेंशनरों के साथ उनके परिवारों से जुड़ा है। ऐसे में यह एक बड़ा और प्रभावशाली मतदाता वर्ग है। फिलहाल विपक्षी दल कर्मचारियों के आंदोलनों के समर्थन में खड़े नजर आ रहे हैं। अगर मान सरकार समय रहते बकाये का समाधान नहीं कर पाती है, तो कांग्रेस, अकाली दल और अन्य विपक्षी दल चुनावी अभियान के दौरान इसे प्रमुख मुद्दा बना सकते हैं। ऐसे में DA का बकाया पंजाब चुनाव में कर्मचारियों को साधने और सरकार को घेरने का बड़ा सियासी हथियार बन सकता है।




