झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में आज झारखंड मंत्रालय में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में मुख्यमंत्री ने विभाग की विभिन्न योजनाओं, विद्यालयों की शैक्षणिक व्यवस्था, आधारभूत सुविधाओं और छात्रों को दी जा रही सुविधाओं की विस्तृत समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सरकार की सभी शैक्षणिक योजनाओं और कार्यक्रमों का लाभ पारदर्शिता के साथ समय पर छात्र-छात्राओं तक पहुंचाया जाए। उन्होंने शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया में तेजी लाने पर भी जोर देते हुए कहा कि शिक्षकों के सभी रिक्त पदों को भरना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में हजारों शिक्षकों की नियुक्ति हुई है और अब बाकी रिक्त पदों को भी जल्द भरा जाए। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि अगले 6 से 8 महीनों के भीतर राज्य का कोई भी स्कूल सिंगल टीचर के भरोसे नहीं चलना चाहिए।
ड्रॉप आउट मामलों में आई कमी
बैठक में अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा में ड्रॉप आउट बच्चों की संख्या में लगातार कमी आ रही है। झारखंड इस मामले में राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। विभाग द्वारा विशेष अभियान चलाकर स्कूल छोड़ चुके बच्चों का दोबारा नामांकन कराया जा रहा है। इसके अलावा श्रम विभाग के साथ समन्वय बनाकर ऐसे बच्चों की पहचान की जा रही है, जो मजदूरी या अन्य कार्यों के कारण शिक्षा से दूर हैं। सरकार की ओर से किताबें, पढ़ाई की सामग्री और साइकिलों का वितरण भी समयबद्ध तरीके से किया जा रहा है।
सरकारी स्कूलों में इंटरनेट और ICT लैब पर जोर
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी सरकारी विद्यालयों में इंटरनेट सुविधा उपलब्ध कराई जाए और आईसीटी लैब को बेहतर बनाया जाए। उन्होंने कहा कि जिन स्कूलों का परीक्षा परिणाम कमजोर रहा है, वहां विशेष ध्यान देकर शिक्षकों, संसाधनों और अन्य व्यवस्थाओं में सुधार किया जाए।
CM स्कूल ऑफ एक्सीलेंस की संख्या बढ़ेगी
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य में CM स्कूल ऑफ एक्सीलेंस की संख्या बढ़ाकर 5 हजार करने की योजना पर तेजी से काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हर पंचायत तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना सरकार का लक्ष्य है। मुख्यमंत्री ने विद्यालय प्रबंधन समितियों के साथ समन्वय बनाकर स्थानीय शिक्षित युवाओं को अस्थायी शिक्षक के रूप में जोड़ने का सुझाव भी दिया। उन्होंने विशेष रूप से छात्राओं को भी अवसर देने पर जोर दिया, ताकि शिक्षकों की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।




