Science & Tech.

तारामंडल में चांद व मंगल पर चलने जैसा होगा एहसास, जानें और क्या होगा खास

पटना| विज्ञान हमारे आस-पास दिखाई देने वाली हर एक चीज की रीढ़ है । यह उपकरण, गैजेट्स, मशीनरी, कारें और बहुत कुछ है। यह इतनी तेजी से विकसित हुआ है कि प्रत्येक मनुष्य अब विज्ञान और उसके आविष्कारों पर निर्भर है। विज्ञान ने एक राष्ट्र के विकास में बहुत योगदान दिया है और यह हमारे दैनिक जीवन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

पटना तारामंडल के पहले फ्लोर पर तैयार किये जा रहे स्पेस एंड एस्ट्रोनॉमी गैलरी में अब दर्शकों को 26 प्रदर्शों के जरिये तारों की दुनिया से रूबरू कराया जायेगा। इस प्रदर्श में ऐसा सतह तैयार किया जायेगा, जिसपर लोगों को वीआर पॉड लगा कर चलने पर चांद व मंगल पर चलने जैसा एहसास होगा।

स्पेस गैलरी के निर्माण में दो करोड़ रुपये खर्च किये जा रहे हैं

600 वर्गफीट में बने रहे एस्ट्रोनोमी एंड स्पेस गैलरी के निर्माण में दो करोड़ रुपये खर्च किये जा रहे हैं। स्पेस एंड एस्ट्रोनॉमी गैलरी का डिजाइन राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद की टीम द्वारा किया गया है। गैलरी का डिजाइन राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद की टीम ने तैयार किया है। दिसंबर के अंत तक नया एस्ट्रोनोमी एंड स्पेस गैलरी तैयार कर लिया जायेगा।

गैलरी में राशियों की दिशा और उसे कौन से महीने में देखा जा सकता है इसकी भी जानकारी दी जायेगी। इसके साथ ही खगोलीय पिंड के कारण उत्पन्न होनेवाले फोर्स को लेजर की मदद से दिखाया जायेगा। विजिटर्स को यूनिवर्स मैपिंग प्रदर्श में आकाशगंगा का विहंगम दृश्य देखने को मिलेगा।

स्कूली बच्चों के लिए एक प्रदर्श आस्क एन एस्ट्रोनॉमर लगाया जायेगा। जिसमें बच्चों को मल्टी मीडिया एवं क्योस्क के जरिये अंतरिक्ष से संबंधित कुछ चुनिंदा सवालों का जवाब दिया जायेगा।

करीब 34 करोड़ रुपये से आधुनिकीकरण होने से यहां सौरमंडल पर बनी वर्ल्ड क्लास फिल्में देख सेंकेगे। इसके साथ ही लेजर प्रोजेक्टर आरजीबी किरणों को कंप्यूटर के माध्यम से मिश्रित कर थ्री-डी शो के लिए वास्तविक रंगों का निर्माण करेगा। दर्शकों की सुविधा के लिए सीटिंग एरेंजमेंट में भी बदलाव किया जायेगा, जो पहले के मुकाबले और भी आरामदायक होगा।

अप्रैल के पहले सप्ताह तक दर्शक यहां नये अंदाज में तारों की दुनिया से होंगे रूबरू

तारामंडल के प्रोजेक्ट एंड प्रोग्रामिंग डायरेक्टर अनंत कुमार ने बताया कि अगले सप्ताह से थ्री-डी स्क्रीन को इंस्टॉल करना शुरू कर दिया जायेगा। इसके बाद साइड वॉल और सीटिंग एरेंजमेंट की व्यवस्था की जायेगी। उन्होंने बताया कि।

=>
=>
loading...
BRIJESH SINGH
the authorBRIJESH SINGH