अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत की। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए इसकी जानकारी दी। दोनों नेताओं के बीच भारत-अमेरिका की व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा हुई। बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने जेडी वेंस और उनकी पत्नी को बेटे के जन्म पर बधाई भी दी।
पीएम मोदी ने एक्स पर दी जानकारी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर पोस्ट कर बताया कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का फोन आया था। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका के बीच सहयोग को अहम क्षेत्रों में और मजबूत करने को लेकर चर्चा की। पीएम मोदी ने जेडी वेंस और ‘सेकंड लेडी’ उषा वेंस को बेटे के जन्म पर शुभकामनाएं भी दीं।
अमेरिकी सीनेट में रूस पर दबाव बढ़ाने वाला बिल पास
दोनों नेताओं के बीच यह बातचीत ऐसे समय हुई है, जब अमेरिकी सीनेट ने रूस और ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने से जुड़ा एक अहम विधेयक भारी बहुमत से पारित किया है। ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट’ को सीनेट में 86-11 वोटों से मंजूरी मिली। इस कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को उन देशों से आने वाले सामान पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है, जो रूस से बड़े पैमाने पर तेल या प्राकृतिक गैस खरीदते हैं। भारत और चीन रूस से कच्चे तेल के प्रमुख खरीदारों में शामिल हैं।
रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर बढ़ सकता है अमेरिकी दबाव
प्रस्तावित कानून का मकसद रूस की अर्थव्यवस्था और उसकी सैन्य गतिविधियों पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है। इसके तहत रूस के शीर्ष राजनीतिक और सैन्य अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों, ऊर्जा परियोजनाओं और युद्ध से जुड़े संगठनों पर नए प्रतिबंधों का प्रावधान भी किया गया है। इसके अलावा रूस द्वारा प्रतिबंधों से बचने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले पुराने और री-फ्लैग्ड तेल टैंकरों पर भी कार्रवाई का दायरा बढ़ाने का प्रस्ताव है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह मामला?
रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रूसी कच्चे तेल की खरीद में बढ़ोतरी की है। रूस से मिलने वाले रियायती तेल ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आयात लागत को नियंत्रित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे में अमेरिकी कानून के तहत रूसी ऊर्जा के बड़े खरीदारों पर संभावित 100 फीसदी तक टैरिफ का प्रावधान भारत के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था रूस से ऊर्जा खरीद जारी रखने और अमेरिकी बाजार तक पहुंच बनाए रखने के बीच देशों पर दबाव बढ़ा सकती है।




