तमिल फिल्म इंडस्ट्री से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। दिग्गज फिल्म निर्देशक, लेखक और अभिनेता भारतीराजा का बुधवार सुबह चेन्नई में निधन हो गया। वह 85 वर्ष के थे और लंबे समय से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे। उनके निधन की खबर से तमिल सिनेमा जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
तमिल फिल्म प्रोड्यूसर्स काउंसिल ने उनके निधन की पुष्टि करते हुए गहरा दुख व्यक्त किया। परिषद ने अपने संदेश में कहा कि उनके पूर्व अध्यक्ष और तमिल सिनेमा के सबसे सम्मानित फिल्मकारों में से एक भारतीराजा अब हमारे बीच नहीं रहे। सोशल मीडिया पर यह खबर सामने आते ही फिल्म जगत और उनके प्रशंसकों ने उन्हें श्रद्धांजलि देना शुरू कर दिया।
अभिनेत्री, निर्माता और राजनेता खुशबू सुंदर ने भी भारतीराजा के निधन पर भावुक पोस्ट साझा किया। उन्होंने लिखा कि तमिल सिनेमा ने अपने सबसे महान निर्देशकों में से एक को खो दिया है। उन्होंने कहा कि भारतीराजा की फिल्में आने वाली पीढ़ियों के लिए फिल्म निर्माण की पाठशाला बनी रहेंगी और उनकी विरासत हमेशा जीवित रहेगी।
भारतीराजा पिछले कुछ वर्षों से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे थे। मार्च 2024 में उनके बेटे और अभिनेता मनोज भारतीराजा का कार्डियक अरेस्ट से निधन हो गया था। बेटे की असमय मौत ने उन्हें गहरा आघात पहुंचाया था, जिसके बाद उनकी सेहत लगातार गिरती चली गई। पिछले वर्ष उन्हें सांस लेने में तकलीफ के कारण अस्पताल में भी भर्ती कराया गया था।
भारतीराजा ने 1977 में फिल्म ’16 वयथिनिले’ से निर्देशन के क्षेत्र में कदम रखा था। चार दशक से अधिक लंबे करियर में उन्होंने 40 से ज्यादा फिल्मों का निर्देशन किया और तमिल सिनेमा को नई पहचान दी। ‘किझाके पोगुम रेल’, ‘सिगप्पू रोजक्कल’, ‘अलायगल ओइवाथिल्लई’, ‘काधल ओवियम’ और ‘मुधल मरियथाई’ जैसी फिल्मों ने उन्हें भारतीय सिनेमा के महान निर्देशकों की श्रेणी में स्थापित किया।
निर्देशन के अलावा उन्होंने अभिनय में भी अपनी अलग पहचान बनाई। वह हाल ही में मोहनलाल के साथ फिल्म ‘थुदारुम’ में नजर आए थे। ‘आयुथा एझुथु’, ‘पांडियानाडू’, ‘ईश्वरन’, ‘तिरुचित्रम्बलम’ और ‘महाराजा’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को भी खूब सराहा गया। उनके निधन के साथ भारतीय सिनेमा के एक स्वर्णिम अध्याय का अंत हो गया।




