लखनऊ: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के तीन बागी विधायक बुधवार को भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने जा रहे हैं। इनमें अमेठी की गौरीगंज सीट से विधायक राकेश प्रताप सिंह, अयोध्या की गोसाईंगंज सीट से विधायक अभय सिंह और जालौन की कालपी सीट से विधायक विनोद चतुर्वेदी का नाम शामिल है। इन तीनों विधायकों के बीजेपी में जाने से प्रदेश की सियासत में नए समीकरण बनने की संभावना है। बीजेपी ने विधायकों के पार्टी में शामिल होने के कार्यक्रम के लिए अमेठी को चुना है। इस दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की मौजूदगी प्रस्तावित है। पार्टी इस कार्यक्रम के जरिए आगामी विधानसभा चुनाव से पहले अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने की तैयारी में है।
राज्यसभा चुनाव में की थी क्रॉस वोटिंग
तीनों विधायक वर्ष 2022 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर विधानसभा पहुंचे थे। हालांकि, फरवरी 2024 में हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान इन विधायकों ने पार्टी लाइन से अलग रुख अपनाते हुए बीजेपी के उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया था। इसके बाद से ही इनके और सपा नेतृत्व के बीच दूरी बढ़ने की चर्चा रही। राकेश प्रताप सिंह को जून 2025 में समाजवादी पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। वह कई मौकों पर सपा की नीतियों और पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाते रहे हैं। अब उनके बीजेपी में शामिल होने से अमेठी सहित आसपास के राजनीतिक क्षेत्रों में इसका असर देखने को मिल सकता है।
राकेश प्रताप सिंह की सियासी पारी
राकेश प्रताप सिंह अमेठी जिले की गौरीगंज विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं। वह वर्ष 2012 से समाजवादी पार्टी से जुड़े रहे और 2017 तथा 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा के टिकट पर जीत दर्ज की। वर्ष 2022 में वह लगातार तीसरी बार विधायक चुने गए थे। फरवरी 2024 के राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के बाद वह पार्टी नेतृत्व के निशाने पर आ गए थे। जून 2025 में सपा ने उन्हें निष्कासित कर दिया। राकेश प्रताप सिंह लगातार पार्टी की नीतियों को लेकर अपनी असहमति जाहिर करते रहे हैं। अब बीजेपी में उनकी एंट्री को अमेठी की राजनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
अभय सिंह के बीजेपी में जाने से अयोध्या में बढ़ेगी हलचल
अभय सिंह अयोध्या जिले की गोसाईंगंज विधानसभा सीट से विधायक हैं। वह समाजवादी पार्टी के चर्चित नेताओं में गिने जाते रहे हैं। पार्टी नेतृत्व के साथ मतभेद और उनके राजनीतिक रुख को लेकर पहले भी चर्चा होती रही है। राज्यसभा चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग के बाद उनका सपा से राजनीतिक संबंध पहले की तरह नहीं रहा। अब बीजेपी में शामिल होने की तैयारी के बीच अयोध्या क्षेत्र की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना जताई जा रही है।
विनोद चतुर्वेदी भी छोड़ेंगे सपा का साथ
विनोद चतुर्वेदी जालौन जिले की कालपी विधानसभा सीट से विधायक हैं। उन्होंने भी 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के टिकट पर जीत हासिल की थी। वर्ष 2024 के राज्यसभा चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार के समर्थन के बाद उनका नाम भी सपा के बागी विधायकों में शामिल हो गया था। अब उनके बीजेपी में शामिल होने की चर्चा के बीच बुंदेलखंड की राजनीति में भी इस घटनाक्रम को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी की रणनीति पर नजर
उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव से पहले दलों के बीच राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। समाजवादी पार्टी के तीन विधायकों का बीजेपी में शामिल होना दोनों दलों के लिए राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। बीजेपी जहां इस घटनाक्रम के जरिए अपने संगठन को मजबूत करने और राजनीतिक बढ़त हासिल करने की कोशिश कर सकती है, वहीं सपा के सामने अपने विधायकों के लगातार बदलते रुख से पैदा हुई चुनौती चर्चा का विषय बनी हुई है। अब सबकी नजरें इस बात पर रहेंगी कि इन विधायकों के बीजेपी में शामिल होने का आगामी चुनाव में कितना असर पड़ता है।




