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‘हनुमान अंश’ को 15 बार देख चुकी हैं नीम करोली बाबा की बेटी, हर बार क्यों छलक पड़े आंसू?

मुंबई: आध्यात्मिक पृष्ठभूमि पर बनी फिल्म ‘हनुमान अंश’ इन दिनों अपनी कहानी और बॉक्स ऑफिस कलेक्शन के साथ-साथ एक भावुक वजह से भी सुर्खियों में है। फिल्म की निर्माता रागिनी सोना के मुताबिक, नीम करोली बाबा की बेटी गिरिजा जी, जिन्हें लोग अम्मा जी के नाम से भी जानते हैं, फिल्म को करीब 15 बार देख चुकी हैं। रागिनी का दावा है कि फिल्म देखने के बाद हर बार अम्मा जी भावुक हुईं और उनकी आंखों से आंसू निकल आए। फिल्म की टीम के लिए यह प्रतिक्रिया इसलिए भी खास है, क्योंकि फिल्म की कहानी नीम करोली बाबा के जीवन और उनकी आध्यात्मिक यात्रा से प्रेरित है।

रिलीज से पहले अम्मा जी का आशीर्वाद लेना चाहती थी टीम

फिल्म के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी और निर्माता रागिनी सोना लंबे समय से नीम करोली बाबा के जीवन और उनके आध्यात्मिक पक्ष पर काम कर रहे थे। रागिनी के मुताबिक, फिल्म रिलीज होने से पहले उनकी इच्छा थी कि बाबा की बेटी गिरिजा जी से संपर्क किया जाए और उनका आशीर्वाद लिया जाए। काफी प्रयास के बाद दोनों की अम्मा जी से फोन पर बातचीत हुई। रागिनी ने उनसे पूछा कि क्या वह फिल्म देखना चाहेंगी। उनके मुताबिक, अम्मा जी ने कहा कि वह फिल्म तभी देखेंगी, जब उन्हें लगेगा कि उसे देखने का उचित समय आ गया है। बाद में उन्होंने फिल्म देखी और फिर उसे दोबारा देखने का सिलसिला चलता रहा।

करीब 15 बार देखी फिल्म, हर बार भावुक हुईं अम्मा जी

रागिनी सोना के अनुसार, अम्मा जी अब तक ‘हनुमान अंश’ को लगभग 15 बार देख चुकी हैं। निर्माता का कहना है कि हर बार फिल्म देखने के बाद वह भावुक हो गईं। रागिनी के लिए यह महज किसी दर्शक की प्रतिक्रिया नहीं थी। उन्होंने इसे बाबा के परिवार की ओर से मिली विशेष प्रतिक्रिया के रूप में देखा। उनका कहना है कि अम्मा जी की भावुकता ने फिल्म की पूरी टीम को प्रभावित किया।

बातचीत में सामने आया करीब पांच दशक पुराना किस्सा

रागिनी ने अम्मा जी से हुई बातचीत का एक अनुभव भी साझा किया। उनके मुताबिक, गिरिजा जी ने जब फिल्म बनाने की प्रेरणा के बारे में पूछा तो उन्होंने अपने बचपन की एक घटना बताई। रागिनी ने बताया कि जब वह करीब छह साल की थीं, तब उनकी मुलाकात नीम करोली बाबा से हुई थी। वहीं निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने बाबा पर किए गए अपने शोध और उनकी जिंदगी को फिल्म के जरिए दर्शकों तक पहुंचाने की इच्छा के बारे में बताया। बातचीत के दौरान रागिनी ने अपने पिता की नैनीताल में पोस्टिंग का भी जिक्र किया।

अम्मा जी ने पिता और भाई से जुड़ी बातें बताईं

रागिनी के मुताबिक, उनकी बात सुनने के बाद अम्मा जी ने उनके पिता का नाम लिया और आगरा में उनके घर की जगह से जुड़ी जानकारी भी बताई। उन्होंने रागिनी के बड़े भाई का नाम भी लिया। रागिनी ने बताया कि करीब 50 साल पुरानी इन बातों का जिक्र सुनकर वह हैरान रह गईं। उन्होंने अम्मा जी से पूछा कि उन्हें ये बातें कैसे मालूम हैं। रागिनी के अनुसार, अम्मा जी ने जवाब दिया कि उन्हें सब कुछ अपनी आंखों के सामने दिखाई दे रहा था। निर्माता ने इस मुलाकात को बेहद भावुक अनुभव बताया।

‘ऐसा लगा जैसे बाबा खुद हमारे सामने हों’

रागिनी की बाद में गिरिजा जी से आमने-सामने मुलाकात भी हुई। उन्होंने बताया कि फिल्म पर काम शुरू करने के समय टीम को यह जानकारी नहीं थी कि नीम करोली बाबा की बेटी जीवित हैं।रागिनी के मुताबिक, अम्मा जी से मिलने के बाद उन्हें उनके व्यक्तित्व में बाबा की झलक महसूस हुई। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा लगा जैसे बाबा स्वयं उनके सामने मौजूद हों। रागिनी ने यह भी बताया कि अम्मा जी आज भी नीम करोली बाबा की शिक्षाओं को अपने जीवन में महत्व देती हैं। इनमें बाबा का संदेश ‘सबसे प्रेम करो, सबको भोजन कराओ’ भी शामिल है।

बाबा के पोते से भी मिली फिल्म की टीम

फिल्म की टीम नीम करोली बाबा के पोते धनंजय जी से भी मुलाकात कर चुकी है। रागिनी ने बाबा के परिवार को सरल और प्रेमपूर्ण बताते हुए कहा कि परिवार से मिले आशीर्वाद को टीम ने विशेष अनुभव के तौर पर लिया। निर्माता के मुताबिक, फिल्म बनाने का उद्देश्य बाबा के जीवन, उनकी आध्यात्मिक यात्रा और उनके विचारों को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना है।

बॉक्स ऑफिस पर भी फिल्म की कमाई जारी

‘हनुमान अंश’ की चर्चा सिर्फ आध्यात्मिक कहानी को लेकर नहीं है, बल्कि फिल्म के बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन को लेकर भी हो रही है। उपलब्ध ट्रेड आंकड़ों के मुताबिक, फिल्म ने दुनियाभर में 347 करोड़ रुपये से अधिक का कलेक्शन किया है। फिल्म का निर्देशन विशाल चतुर्वेदी ने किया है। इसकी कहानी नीम करोली बाबा के जीवन और आध्यात्मिक यात्रा के इर्द-गिर्द बुनी गई है। फिल्म की टीम के मुताबिक, बाबा के परिवार से मिली प्रतिक्रिया ने इस प्रोजेक्ट से जुड़े लोगों के लिए इसकी भावनात्मक अहमियत और बढ़ा दी है।

BRIJESH SINGH
the authorBRIJESH SINGH