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ठाकरे VS दुबे : पटक-पटककर मारेंगे से डुबो-डुबोकर मारेंगे तक पहुंचा मामला

मुंबई। महाराष्ट्र में भाषा को लेकर छिड़ा विवाद अब सियासी गर्मी का कारण बन गया है। हाल ही में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे और झारखंड के गोड्डा से सांसद निशिकांत दुबे के बीच तीखी बयानबाज़ी देखने को मिली। कुछ हफ्ते पहले निशिकांत दुबे ने एक कार्यक्रम के दौरान राज ठाकरे को निशाने पर लेते हुए कहा था कि “अगर वह बिहार आएंगे, तो पटक-पटककर मारा जाएगा।” अब इस पर राज ठाकरे ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

“मुंबई आएं तो समुद्र में डुबो देंगे” — राज ठाकरे

मुंबई में एक सभा को संबोधित करते हुए राज ठाकरे ने जवाबी हमला करते हुए कहा, “अगर निशिकांत दुबे मुंबई आएंगे, तो उन्हें समुद्र में डुबो-डुबोकर मारा जाएगा।” उन्होंने मंच से कहा कि वह न तो मराठी अस्मिता पर समझौता करेंगे और न ही महाराष्ट्र के हितों पर कोई समझौता संभव है।

मैंने राजा ठाकरे को हिंदी सिखा दी” — निशिकांत दुबे

राज ठाकरे के बयान के बाद निशिकांत दुबे ने भी सोशल मीडिया पर पलटवार किया। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर राज ठाकरे के एक वीडियो को शेयर करते हुए कहा कि “मैंने राज ठाकरे को हिंदी सिखा दी।”

अपने भाषण में ठाकरे ने महाराष्ट्रवासियों से अपील की कि वे मराठी भाषा को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में रहने वाले सभी लोग मराठी सीखें और सार्वजनिक जीवन में उसका अधिकाधिक उपयोग करें। उन्होंने कर्नाटक का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां की सरकार अपनी मातृभाषा को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। “वहां एक रिक्शा चालक को भी भरोसा है कि उसकी भाषा के लिए सरकार उसके साथ खड़ी है। महाराष्ट्र में भी ऐसा ही होना चाहिए,” ठाकरे ने कहा।

फडणवीस का रुख— “मराठी ज़रूरी, लेकिन हिंसा नहीं”

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस विवाद पर बयान देते हुए कहा कि राज्य सरकार मराठी भाषा को लेकर प्रतिबद्ध है, लेकिन भाषा के नाम पर हिंसा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

पिछले दिनों बढ़ा था विवाद

गौरतलब है कि बीते दिनों सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे वीडियो सामने आए, जिनमें मनसे कार्यकर्ता हिंदी बोलने वाले लोगों से बहस करते और मारपीट करते दिखे। इसके बाद पूरे राज्य में भाषा को लेकर बहस और तेज हो गई। अब निशिकांत दुबे और राज ठाकरे की तीखी बयानबाज़ी ने इस मुद्दे को और गरमा दिया है, जिससे राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है।

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BRIJESH SINGH
the authorBRIJESH SINGH