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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ में एकजुटता, युवाशक्ति और जनभागीदारी पर दिया जोर

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ के 132वें एपिसोड के जरिए देशवासियों को संबोधित किया। सुबह 11 बजे प्रसारित इस कार्यक्रम में उन्होंने मौजूदा वैश्विक हालात, युवाओं की भूमिका, खेल, फिटनेस, जल संरक्षण और जनभागीदारी जैसे कई अहम मुद्दों पर अपने विचार साझा किए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि मार्च का महीना चुनौतियों से भरा रहा है। कोरोना संकट के बाद दुनिया के आगे बढ़ने की उम्मीद थी, लेकिन पड़ोसी क्षेत्र में जारी युद्ध ने नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। उन्होंने खाड़ी देशों का आभार जताया, जहां लाखों भारतीय रहते हैं और जिन्हें लगातार सहयोग मिल रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि अफवाहों से बचें और सरकारी एडवाइजरी पर भरोसा करें।

कार्यक्रम में ‘ज्ञान भारतम सर्वे’ का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने देशभर की पांडुलिपियों को संरक्षित करने की अपील की। उन्होंने लोगों से ‘ज्ञान भारतम ऐप’ के माध्यम से पांडुलिपियों की जानकारी साझा करने को कहा। अरुणाचल प्रदेश और अमृतसर से मिले उदाहरणों का उल्लेख करते हुए उन्होंने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सराहा।

प्रधानमंत्री ने देश की युवा शक्ति को राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी ताकत बताया। ‘मेरा युवा भारत’ संगठन के जरिए युवाओं की भागीदारी और उनके सुझावों की उन्होंने प्रशंसा की। साथ ही, खेलों में बढ़ती रुचि का जिक्र करते हुए उन्होंने टी20 विश्व कप में भारत की जीत और जम्मू-कश्मीर की रणजी ट्रॉफी जीत को प्रेरणादायक बताया।

फिटनेस पर जोर देते हुए पीएम मोदी ने लोगों से खानपान में सुधार करने की सलाह दी। उन्होंने तेल की खपत में 10 प्रतिशत कमी लाने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की अपील की। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का भी उल्लेख करते हुए उन्होंने नियमित योग को जीवन का हिस्सा बनाने को कहा।

गर्मी के मौसम की शुरुआत के साथ ही उन्होंने जल संरक्षण पर भी जोर दिया। जल संचय अभियानों, अमृत सरोवर और तालाबों की सफाई जैसे प्रयासों को जनभागीदारी का बेहतरीन उदाहरण बताया। साथ ही मछुआरों के जीवन को आसान बनाने के लिए तकनीक के उपयोग का भी जिक्र किया।

वाराणसी में एक घंटे में 2.51 लाख पौधे लगाकर बनाए गए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड का उल्लेख करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि जनभागीदारी से बड़े बदलाव संभव हैं। ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान और सोलर ऊर्जा के बढ़ते उपयोग को भी उन्होंने सकारात्मक परिवर्तन का संकेत बताया। अंत में प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘मन की बात’ सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि देशवासियों के साथ संवाद का सशक्त माध्यम बन चुका है, जिसमें दूर-दराज के इलाकों से भी लोग उत्साह के साथ जुड़ रहे हैं।

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BRIJESH SINGH
the authorBRIJESH SINGH