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RBI ने रेपो रेट 5.25% पर रखा बरकरार, महंगाई और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच नहीं बदली ब्याज दरें

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक बार फिर रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करते हुए इसे 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखने का फैसला किया है। सोमवार से शुरू हुई मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक के बाद बुधवार को आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इस फैसले की घोषणा की। केंद्रीय बैंक ने मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों, महंगाई और वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए ब्याज दरों को स्थिर रखने का निर्णय लिया है।

आरबीआई ने स्पष्ट किया कि इस वर्ष अब तक रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इससे पहले दिसंबर 2025 में केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कटौती की थी। एमपीसी ने इस बार भी अपने मौद्रिक नीति रुख (Monetary Policy Stance) को ‘न्यूट्रल’ बनाए रखा है। भारतीय रिजर्व बैंक हर दो महीने में मौद्रिक नीति की समीक्षा करता है। इस वर्ष फरवरी, अप्रैल, जून और अगस्त में एमपीसी की बैठक हो चुकी है, जबकि अगली बैठक अक्टूबर में प्रस्तावित है।

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि देश में खुदरा महंगाई अभी भी अनुमान से अधिक बनी हुई है। खाद्य पदार्थों और ईंधन की बढ़ती कीमतें महंगाई का प्रमुख कारण हैं, जिससे आपूर्ति व्यवस्था पर भी दबाव बना हुआ है। उन्होंने कहा कि मॉनसून की अनिश्चितता के चलते निकट भविष्य के आर्थिक परिदृश्य को लेकर पूरी तरह स्पष्ट तस्वीर नहीं है। हालांकि, घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है, जो आर्थिक विकास को लगातार समर्थन दे रही है।

गवर्नर ने यह भी कहा कि चुनौतीपूर्ण वैश्विक हालात के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है। उन्होंने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को वैश्विक व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला के लिए एक बड़ी चुनौती बताया। आरबीआई का अनुमान है कि आने वाले समय में खुदरा महंगाई कुछ और बढ़ सकती है, लेकिन तीसरी तिमाही में अपने उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद इसमें धीरे-धीरे गिरावट शुरू होने की संभावना है।

BRIJESH SINGH
the authorBRIJESH SINGH