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“समाज सेवा केवल दान नहीं, बल्कि सशक्त और जागरूक राष्ट्र निर्माण का सबसे बड़ा संकल्प है” – सामाजिक कार्यकर्ता व भाजपा नेता ठाकुर राजेश सिंह

न्यूज़ जर्नलिस्ट अंकित कुमार गोयल

समाज की उन्नति केवल विकास योजनाओं से नहीं होती, बल्कि उन लोगों के प्रयासों से होती है जो निस्वार्थ भाव से समाज के बीच रहकर लोगों की समस्याओं को समझते हैं और उनके समाधान के लिए कार्य करते हैं। ऐसे ही व्यक्तित्व हैं ठाकुर राजेश सिंह, जो लंबे समय से सामाजिक सरोकारों, जनसेवा और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनका मानना है कि समाज सेवा किसी विशेष वर्ग या संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है।

AajKiKhabar.com के लेखक एवं विशेष संवाददाता अंकित कुमार गोयल से विशेष बातचीत में उन्होंने समाज सेवा, युवाओं की भूमिका, शिक्षा, सामाजिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार साझा किए। प्रस्तुत हैं इस विशेष साक्षात्कार के प्रमुख अंश।

सबसे पहले हमारे पाठकों को अपने बारे में बताइए।

राजेश सिंह मैं स्वयं को सबसे पहले समाज का एक जिम्मेदार नागरिक मानता हूँ। वर्षों से विभिन्न सामाजिक गतिविधियों से जुड़ा हूँ और हमेशा प्रयास रहता है कि समाज के जरूरतमंद लोगों की हर संभव सहायता कर सकूँ। मेरे लिए समाज सेवा कोई अभियान नहीं, बल्कि जीवन का उद्देश्य है।

समाज सेवा की प्रेरणा आपको कहाँ से मिली?

उन्होंने कहा: बचपन से परिवार में सेवा, सहयोग और मानवीय मूल्यों का वातावरण मिला। वहीं से यह सीख मिली कि जीवन तभी सार्थक है जब उससे किसी दूसरे व्यक्ति का भी भला हो सके। यही विचार आज भी मुझे समाज के लिए कार्य करने की प्रेरणा देता है।

आज समाज के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है?

उन्होंने बताया:आज सबसे बड़ी चुनौती लोगों के बीच घटता विश्वास और सामाजिक जागरूकता की कमी है। यदि समाज में संवाद, सहयोग और सकारात्मक सोच को बढ़ावा मिले, तो अनेक समस्याओं का समाधान स्वतः निकल सकता है।

युवाओं की भूमिका को आप किस प्रकार देखते हैं?

राजेश सिंह:युवा देश की सबसे बड़ी ताकत हैं। यदि वे केवल अपने भविष्य तक सीमित न रहकर समाज और राष्ट्र के प्रति भी अपनी जिम्मेदारियों को समझें, तो भारत को नई दिशा मिल सकती है। समाज सेवा युवाओं के व्यक्तित्व को भी मजबूत बनाती है।

क्या समाज सेवा केवल बड़े संगठनों का कार्य है?

उन्होंने कहा: बिल्कुल नहीं। समाज सेवा की शुरुआत अपने घर, परिवार और आसपास के लोगों की मदद से होती है। यदि प्रत्येक नागरिक प्रतिदिन एक सकारात्मक कार्य करने का संकल्प ले, तो समाज में बड़ा परिवर्तन संभव है।

शिक्षा और संस्कार को लेकर आपकी क्या सोच है?

उन्होंने कहा:शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं होना चाहिए। शिक्षा व्यक्ति को जिम्मेदार, संवेदनशील और संस्कारी नागरिक भी बनाए। जब शिक्षा के साथ नैतिक मूल्य जुड़ते हैं, तभी समाज और राष्ट्र दोनों मजबूत बनते हैं।

आने वाले समय के लिए आपकी क्या योजनाएँ हैं?

राजेश सिंह:मेरा प्रयास अधिक से अधिक युवाओं को समाज सेवा से जोड़ना, शिक्षा और जागरूकता से जुड़े कार्यक्रमों को आगे बढ़ाना तथा समाज में सकारात्मक सोच और सहयोग की भावना को मजबूत करना है। मेरा विश्वास है कि सामूहिक प्रयासों से ही स्थायी परिवर्तन संभव है।

AajKiKhabar.com के पाठकों के लिए आपका संदेश।

उन्होंने कहा:हर व्यक्ति अपने अधिकारों के साथ अपने कर्तव्यों को भी समझे। समाज, परिवार और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन करें। यदि हम सभी सेवा और सहयोग की भावना के साथ आगे बढ़ेंगे, तो एक मजबूत, शिक्षित और संस्कारित भारत का निर्माण निश्चित रूप से होगा।

मुख्य बातें

समाज सेवा को जीवन का उद्देश्य बताया।
युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी की अपील।
शिक्षा के साथ संस्कार और नैतिक मूल्यों पर विशेष जोर।
सामाजिक जागरूकता और आपसी सहयोग को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया।
प्रत्येक नागरिक से समाज के लिए सकारात्मक योगदान देने का आह्वान किया।

निष्कर्ष

राजेश सिंह का मानना है कि समाज परिवर्तन किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे समाज का सामूहिक दायित्व है। उनके अनुसार यदि प्रत्येक नागरिक अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करे और सेवा की भावना को जीवन का हिस्सा बनाए, तो एक जागरूक, शिक्षित और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण संभव है। उनका संदेश स्पष्ट है कि समाज की वास्तविक शक्ति उसके जागरूक नागरिकों में निहित होती है और वही किसी भी राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की सबसे मजबूत नींव बनते हैं।

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the authorBRIJESH SINGH