दर्द में भी अडिग साधना…
निरंजनी पीठ, निरंजनी अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज की साधना केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि संकल्प, तप और समर्पण की जीवंत मिसाल है।
शरीर पीड़ा से कराह रहा है, उपचार के लिए लेप चल रहा है, लेकिन साधना का आसन आज भी अडिग है। दर्द अपनी जगह है और साधना का संकल्प अपनी जगह। शारीरिक कष्ट के बावजूद उनका शिव पूजन अनवरत जारी है।
एक ओर शरीर विश्राम मांग रहा है, तो दूसरी ओर साधक का संकल्प उन्हें आसन से उठने नहीं देता। यही तपस्या की वह शक्ति है, जहां व्यक्तिगत पीड़ा पीछे छूट जाती है और आराध्य के प्रति समर्पण सर्वोपरि हो जाता है।
स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज की यह साधना श्रद्धालुओं के लिए केवल दर्शन का विषय नहीं, बल्कि धैर्य, आस्था और संकल्प की प्रेरणा बन रही है।
दर्द सहकर भी साधना जारी…
आसन अडिग है, संकल्प अटल है और शिव-पूजन अनवरत है। 🙏🔱




