National

मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता को मंजूरी, CM मोहन यादव बोले- अब नहीं चलेंगे अलग-अलग मजहबी कानून

Oplus_131072

भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा ने मंगलवार को भारी हंगामे और तीखी नोकझोंक के बीच समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) विधेयक पारित कर दिया। विधेयक पेश होते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। कांग्रेस ने इसे जल्दबाजी में लाया गया विधेयक बताते हुए इसे प्रवर समिति (सेलेक्ट कमेटी) के पास भेजने की मांग की और सदन के वेल में उतरकर जोरदार नारेबाजी की। जवाब में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और सत्ता पक्ष के विधायकों ने ‘जय श्री राम’ के नारे लगाए। हंगामे की स्थिति इतनी बढ़ गई कि विधानसभा अध्यक्ष को सदन की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी। हालांकि, विरोध के बीच सरकार ने विधेयक को सदन से पारित करा लिया।

मुख्यमंत्री बोले- अब अलग-अलग मजहबी कानून नहीं चलेंगे

विधानसभा में चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश में अब अलग-अलग मजहबी कानूनों की व्यवस्था नहीं चलेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सभी नागरिकों पर समान कानून लागू होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा, “आज का दिन मध्य प्रदेश के 8.5 करोड़ नागरिकों के लिए ऐतिहासिक और स्वर्णिम दिन है। गोवा, उत्तराखंड और असम के बाद मध्य प्रदेश उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो गया है, जहां समान नागरिक संहिता लागू होगी।”

उन्होंने कहा कि अब प्रदेश “राम से रहीम तक और एंथोनी से अकबर तक” एक ही संविधान और एक ही कानून के तहत चलेगा। मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि देश में अलग-अलग मजहबी कानून नहीं चल सकते।

मुस्लिम समाज के समर्थन का भी किया दावा

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दावा किया कि यूसीसी को मुस्लिम समाज का भी व्यापक समर्थन मिला है। उनके अनुसार, “76 प्रतिशत मुस्लिम महिलाओं और 40 प्रतिशत मुस्लिम पुरुषों ने समान नागरिक संहिता का समर्थन किया है।” उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य सभी नागरिकों को समान अधिकार देना और कानून के समक्ष समानता सुनिश्चित करना है।

महिलाओं के अधिकारों को मिलेगा संरक्षण

मुख्यमंत्री ने कहा कि यूसीसी महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है। उनके अनुसार, इस कानून से महिलाओं को बहुविवाह जैसी समस्याओं से राहत मिलेगी और उनके संवैधानिक अधिकारों को अधिक प्रभावी संरक्षण मिलेगा।

उन्होंने कहा कि यह कानून “एक देश, एक संविधान” की भावना को मजबूत करता है, जिसके लिए डॉ. भीमराव आंबेडकर, सरदार वल्लभभाई पटेल और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने प्रयास किए थे।

कांग्रेस पर साधा निशाना

मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस समाज को बांटने की राजनीति करती रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की नीतियों के कारण देश ने विभाजन जैसी त्रासदी देखी। साथ ही उन्होंने विपक्ष से सवाल किया कि वह समान कानून का विरोध आखिर किस आधार पर कर रहा है।

लिव-इन रिलेशनशिप के लिए होगा पंजीयन

यूसीसी लागू होने के बाद राज्य में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी नए प्रावधान लागू होंगे। कानून के तहत लिव-इन संबंध स्थापित करने के लिए पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। पहचान दस्तावेजों के आधार पर सत्यापन किया जाएगा, जिससे नाम बदलकर या पहचान छिपाकर धोखा देने की आशंका कम होगी।

सरकार ने यूसीसी की धारा 366 के तहत बल, दबाव या कपटपूर्वक सहमति लेकर लिव-इन रिलेशनशिप स्थापित करने पर पांच वर्ष तक के कारावास का प्रावधान किया है।

सरकार का दावा- ‘लव जिहाद’ के मामलों में आएगी कमी

राज्य सरकार का दावा है कि यूसीसी लागू होने के बाद कथित ‘लव जिहाद’ से जुड़े मामलों में कमी आएगी। सरकार का कहना है कि पहचान का सत्यापन अनिवार्य होने से नाम बदलकर धोखा देने की घटनाओं पर प्रभावी रोक लग सकेगी।

2021 का धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम नहीं रहा प्रभावी

मध्य प्रदेश सरकार ने वर्ष 2021 में कथित ‘लव जिहाद’ की घटनाओं पर रोक लगाने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम लागू किया था। हालांकि, सरकार के अनुसार यह कानून अपेक्षित स्तर पर प्रभावी साबित नहीं हुआ।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस अधिनियम के तहत अब तक 430 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें केवल 58 मामलों का फैसला हो पाया है। इनमें 51 मामलों में आरोपित बरी हो गए, जबकि दो मामलों में खात्मा लगा दिया गया। वहीं करीब 150 मामले अभी भी विभिन्न न्यायालयों में लंबित हैं।

यूसीसी लागू होने के बाद राज्य सरकार का मानना है कि विवाह, परिवार और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े मामलों में एक समान कानूनी व्यवस्था स्थापित होगी, जिससे कानून के क्रियान्वयन में अधिक स्पष्टता आएगी।

BRIJESH SINGH
the authorBRIJESH SINGH