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कानपुर में बाढ़ राहत शिविर में एक्सपायरी सिरप मिलने का आरोप, स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की जांच

कानपुर। पांडु नदी का बढ़ता जलस्तर बर्रा मायापुरम इलाके के बाढ़ प्रभावित लोगों की मुश्किलें बढ़ा रहा है। घरों में पानी भरने और संक्रमण के खतरे के बीच राहत के तौर पर बांटी गई दवाओं में कथित तौर पर एक्सपायरी सिरप मिलने का मामला सामने आया है। परिजनों का आरोप है कि जुलाई 2026 में एक्सपायर हो चुके सिरप का सेवन करने के बाद कई बच्चों की तबीयत बिगड़ गई और उन्हें उल्टियां होने लगीं। हालांकि, बच्चों की तबीयत खराब होने का सीधा कारण सिरप ही था, इसकी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने संबंधित सिरप के बैच नंबर और सप्लाई चैन की जांच शुरू कर दी है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. हरिदत्त नेमी ने कहा कि सोशल मीडिया के जरिए मामले की जानकारी मिलने के बाद दवा की जांच कराई जा रही है।

करीब 20 परिवारों को बांटी गई थीं दवाएं

जानकारी के मुताबिक, सोमवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम मायापुरम इलाके में करीब 20 बाढ़ प्रभावित परिवारों को दवाएं बांटने पहुंची थी। इसी दौरान एक सिरप भी वितरित किया गया। परिजनों का दावा है कि बोतल पर इसकी एक्सपायरी डेट जुलाई 2026 दर्ज थी। बर्रा मायापुरम निवासी जयपाल और मीना के चार वर्षीय बेटे ऋषभ को भी यह सिरप दिया गया था। मीना के मुताबिक, सिरप पीने के बाद बच्चे को उल्टियां होने लगीं। इसके बाद उसे निजी डॉक्टर के पास ले जाया गया, जहां इलाज के बाद उसकी हालत में सुधार बताया गया। इसी तरह सोनम और रिंकू के तीन वर्षीय बेटे रुद्र तथा अंकिता और अजय के तीन वर्षीय बेटे आयुष की तबीयत बिगड़ने की शिकायत भी परिजनों ने की है। हालांकि, इन बच्चों की तबीयत खराब होने और कथित एक्सपायरी सिरप के सेवन के बीच संबंध की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

दवा को लेकर लोगों में बढ़ा अविश्वास

एक साथ कई बच्चों की तबीयत खराब होने की शिकायत सामने आने के बाद बाढ़ प्रभावित इलाके में दवाओं को लेकर लोगों में अविश्वास पैदा हो गया। कुछ परिवारों ने सिरप समेत अन्य दवाएं भी फेंक दीं। मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम दोबारा दवाएं लेकर मायापुरम पहुंची, लेकिन कई बाढ़ प्रभावित लोगों ने दवाएं लेने से इनकार कर दिया। लोगों ने मांग की कि दवाओं की एक्सपायरी डेट, बैच नंबर और सप्लाई से जुड़ी पूरी जानकारी पहले सार्वजनिक की जाए। स्थानीय लोगों का कहना है कि बाढ़ और संक्रमण के खतरे के बीच बीमारी से बचाव के लिए दी जा रही दवा ही संदिग्ध हो तो वे उसे लेने का जोखिम नहीं उठा सकते।

बच्चे के इलाज के लिए 100 रुपये देने का आरोप

ऋषभ की मां मीना ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गलती से सिरप दिए जाने की बात कही और बच्चे के इलाज के लिए 100 रुपये देने की पेशकश की। परिवार ने रुपये लेने से इनकार कर दिया। परिजनों का सवाल है कि यदि बच्चे की तबीयत ज्यादा गंभीर हो जाती तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होती। उनका कहना है कि आपदा के दौरान राहत सामग्री और दवाओं की गुणवत्ता और मियाद की जांच में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

CMO बोले- हाल में टीम को नहीं दी गई थी दवा

CMO डॉ. हरिदत्त नेमी के मुताबिक, संबंधित सिरप वर्ष 2025 में सरकारी सप्लाई के तहत विभाग को मिला था। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि यह दवा वर्तमान में विभाग के स्टॉक में उपलब्ध नहीं है और हाल में किसी स्वास्थ्य टीम को वितरित भी नहीं की गई थी। उन्होंने बताया कि सरकारी दवाओं की सप्लाई की रजिस्टर में एंट्री होती है और वितरण से पहले उनकी एक्सपायरी डेट की जांच की जाती है। ऐसे में कथित तौर पर एक्सपायर सिरप राहत शिविर तक कैसे पहुंचा, इसकी जांच की जा रही है। CMO ने कहा कि जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई गई तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई होगी। वहीं, सोशल मीडिया पर मामले से जुड़ी गलत जानकारी फैलाए जाने की पुष्टि होने पर उस पहलू की भी जांच की जाएगी।

BRIJESH SINGH
the authorBRIJESH SINGH