
(न्यूज़ जर्नलिस्ट अंकित कुमार गोयल)
सवाल:
जो सेरेब्रल पाल्सी वाले बच्चे हैं, जब उनको पहली बार आप चलते हुए देखते हैं, तो उस पल को शब्दों में कैसे बयां करेंगे?
जवाब:
मैंने एक कहानी सुनी थी। कहा जाता है कि माता सीता की कुछ सखियां भगवान शिव की पूजा कर रही थीं। तभी वहां भगवान राम आए। एक सखी ने उन्हें देखा और आकर सीता जी से कहा कि मैंने आपके वर को देखा है। सीता जी ने पूछा कि वे कैसे हैं? सखी बोली कि मैं बता ही नहीं सकती कि वे कैसे हैं। ऐसा ही है जैसे किसी गूंगे को मिठाई खिलाकर पूछा जाए कि स्वाद कैसा था। हाथ हिलते हैं, चेहरे के भाव बदलते हैं, लेकिन शब्द नहीं निकल पाते। मेरे साथ भी ऐसा ही होता है। जब मैं अपने उन बच्चों को पहली बार चलते हुए देखता हूं, तो ऐसा लगता है जैसे मुझे दुनिया का सबसे बड़ा पुरस्कार मिल गया हो। उस खुशी को व्यक्त करने के लिए कोई शब्द पर्याप्त नहीं होते।

सवाल:
जो आईटी प्रोफेशनल्स हैं, उनकी टूटी कमर के पीछे असली कारण क्या है? उनकी कुर्सी, स्क्रीन टाइम या उनकी आदतें?
जवाब:
देखिए, किसी भी व्यक्ति के खराब पोश्चर के पीछे सबसे बड़ा कारण उसका दिमाग और उसकी कार्यशैली होती है।
जब कोई आईटी प्रोफेशनल घर से तैयार होकर ऑफिस जाता है, तो वह टेढ़ा-मेढ़ा बैठने की नीयत से नहीं जाता। वह सही पोश्चर में काम शुरू करता है। लेकिन काम का दबाव, लगातार स्क्रीन पर बने रहना, कोडिंग करना, मीटिंग्स में शामिल होना और मानसिक तनाव धीरे-धीरे उसके शरीर को भी प्रभावित करने लगता है। वह हंसना, खेलना, गाना और मुस्कुराना भूल जाता है। कई कंपनियां इसी कारण अपने कर्मचारियों के लिए जिम, स्पोर्ट्स और मनोरंजन की गतिविधियां भी आयोजित करती हैं। लेकिन यदि व्यक्ति रोज तनाव में जी रहा है और केवल कभी-कभार ऐसी गतिविधियों में हिस्सा ले रहा है, तो उससे बहुत बड़ा बदलाव नहीं आता।जैसे घर में रोज क्लेश हो और एक दिन पूजा कर ली जाए, तो उससे शांति नहीं आती। उसी प्रकार यदि जीवनशैली तनावपूर्ण है, तो शरीर भी उसका असर दिखाने लगता है।तनाव की स्थिति में व्यक्ति को भूख नहीं लगती, नींद प्रभावित होती है और छोटी-छोटी बातें भी उसे परेशान करने लगती हैं। यही प्रभाव शरीर पर भी पड़ता है और कमर दर्द, गर्दन दर्द जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं।
सवाल:
फिजियोथेरेपी के क्षेत्र में आपने सबसे बड़ी गलती क्या देखी है, जो लोग बार-बार करते हैं?
जवाब:
सबसे बड़ी गलती लोग अपने पोश्चर और जीवनशैली के साथ करते हैं।आज के समय में लगभग 98 प्रतिशत मरीज वर्क रिलेटेड डिसऑर्डर और पोस्टरल प्रॉब्लम्स से ग्रसित हैं।पहले के समय में सर्वाइकल, गठिया या उम्र से जुड़ी समस्याएं अधिक देखने को मिलती थीं। लेकिन आज यदि किसी व्यक्ति को बिना चोट के कमर, गर्दन या घुटनों में दर्द है, तो उसका सबसे बड़ा कारण गलत पोश्चर और खराब जीवनशैली है।

सवाल:
फिजियोथेरेपी में कहा जाता है कि सबसे बड़ी टेक्नोलॉजी मशीन नहीं, बल्कि हाथ होते हैं। आपके हाथ मरीज की बॉडी में ऐसा क्या पढ़ लेते हैं, जो एमआरआई भी नहीं दिखा पाती?
जवाब:
यदि आप अपने काम से प्रेम करते हैं, तो आप बहुत सी चीजों को महसूस करना सीख जाते हैं।जैसे घर में मां केवल चावल की खुशबू से बता देती है कि चावल पक गए हैं या नहीं। वह बिना चखे भी समझ जाती है कि दाल में नमक कम है या ज्यादा। उसे पता होता है कि किस सब्जी को कैसे काटना है और किस बर्तन को किस तरह साफ करना है।यह अनुभव से आता है।इसी प्रकार, जब आप लगातार मरीजों के साथ काम करते हैं, तो मांसपेशियां आपको अपनी कहानी बताने लगती हैं।यदि आपको कोई मित्र गले लगाए, आपका बच्चा गले लगाए या आपका जीवनसाथी गले लगाए, तो हर स्पर्श का अनुभव अलग होता है।मांसपेशियां भी इसी प्रकार संवाद करती हैं। वे बताती हैं कि तकलीफ कहां है और उसका कारण क्या है।इसलिए मैं कहता हूं कि मांसपेशियां भी बात करती हैं। बस उन्हें सुनने की क्षमता विकसित करनी होती है।
सवाल:
आप दिन में आठ से दस घंटे दूसरों का इलाज करते हैं। डॉ. महिपाल सिंह अपनी खुद की रीढ़ की हड्डी का ख्याल कैसे रखते हैं? हमारे पाठकों के लिए कोई पांच मिनट का संदेश?

जवाब:
सबसे महत्वपूर्ण बात है खुश रहना।जब आप किसी काम को मजबूरी में करते हैं, तो वह बोझ लगने लगता है और तनाव पैदा करता है।
आप घर में झाड़ू लगाते हैं, तो कमर दर्द की शिकायत होने लगती है। लेकिन उसी किसान के बारे में सोचिए, जो सुबह से शाम तक खेत में काम करता है। वह थकता जरूर है, लेकिन हर बार कमर दर्द की शिकायत नहीं करता।मेरा मानना है कि हम अपनी मिट्टी से दूर होते जा रहे हैं।आज लोग संगमरमर के फर्श और बंद जूतों के बीच रहने लगे हैं। जबकि प्रकृति से जुड़ाव भी शरीर के लिए आवश्यक है।
मैं रोज कुछ समय मिट्टी के संपर्क में बिताता हूं। अपने पैरों और हाथों को मिट्टी से जोड़ता हूं। साथ ही, मैं अपने परिवार और बच्चों के साथ अधिक समय बिताने की कोशिश करता हूं।मेरे लिए खुश रहना और अपनों के साथ समय बिताना भी स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
सवाल:
मोबाइल और लैपटॉप वाली जनरेशन के लिए – 2026 में खड़े होकर काम करना बेहतर है या बैठकर? आपकी इंजीनियरिंग वाली नजर में कौन जीतता है?

जवाब:
मेरी नजर में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप सही पोश्चर में, रिलैक्स होकर काम करें।भगवान ने हमें शरीर के माध्यम से बहुत से संकेत दिए हैं।भूख लगती है, तो शरीर बताता है। प्यास लगती है, तो शरीर संकेत देता है। शरीर में कहीं खुजली होती है, तो हाथ स्वतः उसी जगह पहुंच जाता है।इसी प्रकार हमारा शरीर हमें यह भी बताता है कि किस स्थिति में हमें आराम मिल रहा है और किस स्थिति में परेशानी हो रही है।
शरीर की भाषा को समझना जरूरी है। यदि हम अपने शरीर की बात सुनना सीख जाएं, तो बहुत सी समस्याओं से बच सकते हैं।

अगले भाग में पढ़िए:
अगर डॉ. महिपाल सिंह एक दिन के लिए स्कूल के प्रिंसिपल बन जाएं तो क्या बदलेंगे?
क्या फिजियोथेरेपी सिर्फ बुजुर्गों के लिए है?
रोबोटिक फिजियोथेरेपी पर डॉ. महिपाल सिंह की बेबाक राय।
अगर दर्द बोल सकता, तो आईटी प्रोफेशनल्स से क्या कहता?




