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जल निगम भर्ती घोटाले में आजम की लखनऊ कोर्ट में हुई पेशी, वापस भेजे गए जेल

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान की आज लखनऊ CBI कोर्ट में पेशी हुई। आजम खान की पेशी करीब एक घंटे तक चली। अखिलेश सरकार में हुए जल निगम भर्ती घोटाले में आजम खान की आज पेशी हुई। कोर्ट से बाहर निकलकर आजम अपने वकीलों से बात करते नजर आए। बता दें, इस मामले में आजम को मार्च 2022 में जमानत मिल चुकी है। फिलहाल आज की सुनवाई में आजम खान पर आरोप तय नहीं हो सके। आजम खान 28 महीनों से जेल में बंद हैं।

क्या था जल निगम भर्ती घोटाला?

अखिलेश यादव की सरकार में जब जल निगम की भर्तियों में घोटाले का मामला सामने आया, उस समय आजम खान जल निगम के चेयरमैन थे। लिहाजा आजम को इसमें आरोपी बनाया गया था। यूपी जल निगम में 122 सहायक अभियंता, 853 अवर अभियंता, 335 क्लर्क, 32 आशुलिपिक समेत 1342 पदों पर भर्तियां हुई थीं। इन्हीं भर्तियों को लेकर घोटाले का आरोप लगा।

मार्च 2017 में उत्तर प्रदेश में बीजेपी सरकार आई तो इस मामले में जांच के आदेश दिए गए और 122 भर्ती हुए अभियंताओं को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। SIT ने इस मामले में 25 अप्रैल 2018 को FIR दर्ज कराई। FIR में जल निगम के चेयरमैन रहे आजम खां के साथ गिरीश चंद श्रीवास्तव, विश्वजीत सिंह, नीरज मलिक, अजय यादव, संतोष रस्तोगी, रोमन फर्नांडीस और कुलदीप सिंह नेगी नामजद किए गए।

जांच के दौरान पता चला कि चहेतों को नौकरी देने के लिए भर्ती के सारे नियमों को ताक पर रख दिया गया। ऐसे में लिखित परीक्षा से लेकर इंटरव्यू तक में मनमाने ढंग से नंबर दिए गए। SIT को जांच के दौरान तमाम सुबूत मिले, जो तत्कालीन अधिकारियों की कार्यप्रणाली बता रहे थे। लिखित परीक्षा के बाद वेबसाइट पर आंसर की अपलोड की जाती है। जल निगम ने इसके लिए मुंबई की कंपनी से एग्रीमेंट भी किया, लेकिन कंपनी ने आंसर की अपलोड नहीं की।

SIT ने अपनी जांच रिपोर्ट में कहा, कंपनी ने JE मेंस और JE एडवांस या GATE में जो परीक्षा प्रक्रिया अपनाई जाती है, उन प्रक्रियाओं को नहीं अपनाया। इससे लिखित परीक्षा पर सवाल खड़े होते हैं। लिपिक परीक्षा में 1,06,770 अभ्यर्थियों ने भाग लिया, जिनमें से सिर्फ 335 पास हुए। जांच में SIT को शक हुआ कि जिस उत्तर पुस्तिका का मूल्यांकन हुआ, वह अभ्यर्थी की वास्तविक है या नहीं इसकी पुष्टि भी नहीं की जा सकती। SIT ने इस मामले में धोखाधड़ी, षड्यंत्र, फर्जी दस्तावेज तैयार करना और सबूत मिटाने की धाराओं चार्जशीट दाखिल कर दी थी।

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BRIJESH SINGH
the authorBRIJESH SINGH