देशभर में पेपर लीक और परीक्षा में धांधली पर रोक लगाने के उद्देश्य से संसद द्वारा पारित ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन अधिनियम, 2026’ को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिल गई है। राष्ट्रपति की स्वीकृति के साथ ही यह कानून पूरे देश में लागू हो गया है। सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य सरकारी और प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और लाखों युवाओं के भविष्य की रक्षा करना है। यह विधेयक विपक्ष के वॉकआउट के बीच संसद के दोनों सदनों से पारित हुआ था। लोकसभा ने इसे पहले पारित किया, जबकि राज्यसभा ने गुरुवार को ध्वनिमत से मंजूरी दी। इसके बाद राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने पर यह विधेयक कानून बन गया।
धांधली करने वालों पर कड़ी सजा
नए कानून के तहत सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल या अन्य अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने के दोषियों को 5 से 10 वर्ष तक की सजा और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। वहीं, पेपर लीक से जुड़े संगठित गिरोहों या सिंडिकेट के खिलाफ और भी सख्त प्रावधान किए गए हैं। ऐसे मामलों में कम से कम 7 वर्ष की कैद और कम से कम 10 करोड़ रुपये के जुर्माने का प्रावधान रखा गया है।
पीएम मोदी ने बताया युवाओं के हित में बड़ा कदम
संसद से विधेयक पारित होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी कर इसे युवाओं के भविष्य की सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि सरकार परीक्षा प्रणाली को आधुनिक तकनीक के जरिए अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बना रही है, ताकि कोई भी पेपर लीक माफिया छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न कर सके। सरकार का दावा है कि नया कानून परीक्षा प्रक्रिया में निष्पक्षता बढ़ाने, पेपर लीक पर प्रभावी रोक लगाने और प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा।




