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न्यूज़ जर्नलिस्ट अंकित कुमार गोयल के साथ होली चाइल्ड पब्लिक इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल प्रवेंद्र दहिया का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू

(न्यूज़ जर्नलिस्ट अंकित कुमार गोयल)

आपने अपने करियर की कैसे शुरुआत की और परिवार का कितना सहयोग मिला?

पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद मैंने कुछ दिन ट्यूशन पढ़ाया और उसके बाद लगभग 5 महीने प्राइवेट जॉब की लेकिन फिर दादा जी की प्रेरणा से उन्होंने कहा कि जब आप ट्यूशन भी पढ़ रहे हैं तो क्यों नहीं इस फील्ड में आए तब उनकी प्रेरणा से 2004 में शुरुआत की विद्यालय के चलने की और परिवार का काफी सहयोग रहा माता-पिता का बहनों का और उसी के साथ-साथ पूरे ग्रामीण वासियों का पूरा सहयोग मिला।

2004 में जब ग्रामीण इलाकों में स्कूल खोलना भी चुनौती था, तब स्मार्ट क्लासेस विजन कैसे आया? शुरुआती मुश्किलें क्या थीं?

जब मैंने देखा कि 21वीं शताब्दी में शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा ही बदलाव हो रहा है और गांव में भी गांव के विद्यार्थियों को एक स्मार्ट क्लासेस के द्वारा शिक्षित किया जाए ताकि उनकी और समझा और अंडरस्टैंडिंग बढ़ सके।

आपने कहा ‘गांव में प्रतिभा नहीं, अवसरों की कमी है’। इस कमी को दूर करने के लिए पहला ठोस कदम क्या उठाया था?

गांव में नई सोच एवं सही विजन के साथ में शिक्षा देना ही उचित समझा ताकि विद्यार्थियों को नए अवसर शिक्षा के क्षेत्र में प्राप्त हो सके। 2011 में गांव में स्मार्ट क्लासेस शुरू करना रिस्क था। अभिभावकों और टीचर्स को नई तकनीक के लिए कैसे तैयार किया? रिस्क तो था ही और वह उठाया भी काफी खर्चा भी हुआ स्मार्ट क्लासेस लगाने में उसे समय नया प्रचलन एवं शुरुआती शिक्षा के क्षेत्र में नहीं क्रांति थी लेकिन धीरे-धीरे जब विद्यार्थियों की सोच में परिवर्तन आया तो अभिभावकों का भी सहयोग मिलना शुरू हुआ।

फाइनेंशियल लिटरेसी और AI जैसे विषय छोटे बच्चों को कैसे पढ़ाए जाते हैं? कोई उदाहरण दें। समय-समय पर विद्यार्थियों के लिए वर्कशॉप एवं गेस्ट लेक्चरर कराए जाते हैं ताकि विद्यार्थी ai का फाइनेंशियल अंडरस्टैंडिंग बढ़ सके ।

अबेकस-वैदिक गणित से लेकर मार्शल आर्ट्स तक – इतनी विविध एक्टिविटी का शेड्यूल कैसे मैनेज करते हैं? पढ़ाई पर असर तो नहीं पड़ता?

हफ्ते में दो-दो दिन के शेड्यूल लगाए गए हैं ताकि इस तरह की शिक्षा विद्यार्थियों को मिल सके ।

HUNAR THE TALENT SHOW’ को क्षेत्र में प्रतिष्ठित मंच कैसे बनाया? इससे बच्चों को क्या फायदा मिला?

विद्यार्थियों के अंदर बहुत ही प्रतिभा छिपी हुई होती है लेकिन उसे मंच पर लाना यह एक अति आवश्यक है इसी उद्देश्य से टैलेंट हंट शो कराए जाते हैं ।

पुलिस की पाठशाला, SPIC MACAY जैसी पहल ग्रामीण बच्चों की सोच कैसे बदल रही हैं? कोई बदलाव देखा है?

पुलिस की पाठशाला में विद्यार्थियों को पुलिस की कार्यशैली के विषय में बताया जाता है कि पुलिस भी हमारे सहयोगी हैं साथ ही साथ स्पीक में के द्वारा भारतीय संस्कृति भारतीय शास्त्रीय संगीत को जानने का अवसर प्राप्त होता है।

संस्कारशाला और मेडिटेशन सेशन आज के डिजिटल युग में कितने प्रासंगिक हैं? बच्चों का रिस्पॉन्स कैसा रहता है?

संस्कारशाला से विद्यार्थियों की आदतों से लेकर उनके व्यवहारों को बदलने के लिए संस्कारशाला का आयोजन किया जाता है इसमें अनुभवी शिक्षक के द्वारा एवं समय-समय पर कार्यशाला के द्वारा संस्कारशाला आयोजित की जाती है ताकि उनके अंदर एक स्वयं अनुशासन एवं अच्छी आदतों का विकास हो सके और समाज में एक आदर्श विद्यार्थी के रूप में भी उतरे और अपने जीवन को सफल बना सके ।

 

आपके छात्र सब-इंस्पेक्टर से लेकर उद्यमी तक बन रहे हैं। सबसे गर्व का पल कौन सा था जब लगा कि ‘मिशन सफल हुआ’?

बड़ा ही अच्छा लगता है जब विद्यार्थी किसी प्रशासनिक सेवा में जाते हैं चाहे वह सब इंस्पेक्टर हो अन्य प्रशासनिक सेवा में हो या इंजीनियर हो डॉक्टर हो तो बहुत बड़ा ही गर्व महसूस होता है इसी के चलते इसी तरह की तैयारी विद्यार्थियों को प्रारंभ से ही कराई जाती है और तभी वह एक नई दशा और दिशा के साथ आगे बढ़ते हैं।

दूसरे ग्रामीण स्कूलों के लिए आप एक मॉडल हैं। अगर कोई नया स्कूल आपका फॉर्मूला अपनाना चाहे तो 3 सबसे जरूरी सलाह क्या देंगे?

अगर देखा जाए तो सर्वप्रथम विद्यालय में श्रेष्ठ शिक्षा संस्कार एवं अनुशासन ही स्कूल की नई को मजबूत करता है और एक अच्छे गुणवत्ता वाली शिक्षा से ही नए मॉडल के स्कूल तैयार किया जा सकते हैं अच्छे शिक्षक हो अनुभवी हो और उन्हें समय-समय पर सभी शिक्षकों की ट्रेनिंग होती रहे कार्यशाला होते रहे ताकि नए-नए आयाम को वशीकरण विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा दे सके।

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BRIJESH SINGH
the authorBRIJESH SINGH