गुरुग्राम की अदालत ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा को सात दिन की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) हिरासत में भेज दिया है। अदालत ने कहा कि मामले में पैसों के लेन-देन, कथित फर्जी कंपनियों और फर्जी बिलिंग की जांच के लिए ईडी को आरोपी से पूछताछ की जरूरत है।
ईडी ने अदालत को बताया कि 17 अप्रैल 2026 को हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड और उससे जुड़ी कई जगहों पर छापेमारी की गई थी। जांच एजेंसी के मुताबिक कंपनी ने मोबाइल फोन एक्सपोर्ट के नाम पर करीब 157 करोड़ रुपये का कारोबार दिखाया। इनमें से लगभग 102 करोड़ रुपये का एक्सपोर्ट सिर्फ यूएई की दो कंपनियों को किया गया था। ईडी का दावा है कि ये दोनों कंपनियां आपस में जुड़ी हुई हैं।
जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि कई सप्लायर कंपनियां केवल कागजों पर मौजूद थीं। इन कंपनियों पर बिना सामान की सप्लाई किए फर्जी बिल जारी करने और जीएसटी रिफंड लेने का आरोप है। ईडी के अनुसार पूरे मामले में कई शेल कंपनियों और बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया, ताकि पैसों के असली स्रोत और लेन-देन को छिपाया जा सके। ईडी ने अदालत में कहा कि संजीव अरोड़ा कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर थे तथा पूरे कारोबार पर उनका नियंत्रण था। एजेंसी का आरोप है कि फर्जी खरीद, फर्जी एक्सपोर्ट और जीएसटी रिफंड के जरिए अवैध तरीके से पैसा कमाया गया।
वहीं बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि संजीव अरोड़ा को झूठे मामले में फंसाया गया है। उनके वकीलों ने कहा कि ईडी के पास ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है, जिससे मनी लॉन्ड्रिंग साबित हो सके। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि मामला FEMA नियमों से जुड़ा है और अब तक किसी अपराध से अर्जित आय का स्पष्ट रिकॉर्ड सामने नहीं आया है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि शुरुआती जांच में गंभीर आरोप सामने आए हैं और पैसों के लेन-देन की पूरी कड़ी समझने के लिए हिरासत में पूछताछ जरूरी है। इसके बाद अदालत ने संजीव अरोड़ा को सात दिन के लिए ईडी रिमांड पर भेज दिया। साथ ही अदालत ने आरोपी को मेडिकल सुविधा और अपने वकील से मिलने की अनुमति भी दी है।




