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जस्टिस एस. अब्दुल नजीर बने आंध्रप्रदेश के गवर्नर, राम मंदिर पर फैसला सुनाकर सुर्खियों में आए थे

नई दिल्ली। राम जन्मभूमि मंदिर को लेकर दो समुदायों के बीच लंबे समय से चला आ रहा विवाद था, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने आखिरकार 9 नवंबर, 2019 को फैसला सुनाया था। जस्टिस एस अब्दुल नजीर सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय बेंच में से एक थे जिन्होंने अंतिम फैसला दिया था। अयोध्या मामले में फैसला सुनाने और राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करने वाली पीठ में वे अकेले अल्पसंख्यक न्यायाधीश थे।

जनवरी में हुए थे सेवानिवृत्त

जस्टिस एस. अब्दुल नजीर सुप्रीम कोर्ट से रिटायर होने के एक महीने बाद उनको आंध्र प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।

एक वकील के रूप में लिया था दाखिला

5 जनवरी, 1958 को कर्नाटक दक्षिण कन्नड़ जिले के बेलुवई में जन्मे जस्टिस नजीर ने एसडीएम लॉ कॉलेज, मंगलुरु से एलएलबी की डिग्री पूरी करने के बाद 18 फरवरी, 1983 को एक वकील के रूप में दाखिला लिया था।

उन्होंने कर्नाटक उच्च न्यायालय के समक्ष अभ्यास किया और 12 मई, 2003 को इसके अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्त हुए। वह 24 सितंबर, 2004 को स्थायी न्यायाधीश बने और 17 फरवरी, 2017 को सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नत हुए।

जस्टिस नजीर कई ऐतिहासिक संविधान पीठ के फैसलों का हिस्सा थे, जिसमें ट्रिपल तलाक, निजता का अधिकार, अयोध्या मामला और हाल ही में नोटबंदी पर केंद्र के 2016 के फैसले और सांसदों की अभिव्यक्ति की आजादी शामिल है।

न्यायमूर्ति ने उस संविधान पीठ का नेतृत्व किया जिसने 2016 की नोटबंदी की प्रक्रिया को भी बरकरार रखा था।उन्होंने यह भी घोषणा की थी कि मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और नेताओं के अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने की कोई आवश्यकता नहीं है।

इससे पहले, न्यायमूर्ति नजीर ने कहा कि भारतीय न्यायपालिका की स्थिति आज उतनी गंभीर नहीं है जितनी पहले हुआ करती थी, हालांकि गलत सूचना के कारण गलत धारणा व्यक्त की जाती है।

Reporter – Suraj Awasthi

BRIJESH SINGH
the authorBRIJESH SINGH