बेंगलुरु: आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने रविवार को बेंगलुरु स्थित आर्ट ऑफ लिविंग आश्रम का दौरा किया। तीनों नेताओं ने आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लिया। यह कार्यक्रम आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन की मानव सेवा के 45 साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित किया गया था। इस दौरान पंजाब और देश की शांति, समृद्धि और विकास को लेकर प्रार्थना की गई। नेताओं ने समाज कल्याण, शिक्षा, मानसिक स्वास्थ्य, ध्यान और सामाजिक सौहार्द जैसे मुद्दों पर भी अपने विचार रखे।
केजरीवाल बोले- दो दशक से ज्यादा पुराना है जुड़ाव
अरविंद केजरीवाल ने श्री श्री रविशंकर के साथ अपने लंबे जुड़ाव का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनका आर्ट ऑफ लिविंग से संबंध दो दशक से भी ज्यादा पुराना है और इस दौरान उन्हें गुरुदेव का स्नेह और मार्गदर्शन मिला है। केजरीवाल ने बताया कि हाल ही में उन्होंने सुदर्शन क्रिया भी सीखी है। उन्होंने इसके पीछे मनीष सिसोदिया की भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि सिसोदिया ने जेल में रहते हुए इस क्रिया को सीखा था और बाहर आने के बाद उन्हें भी इसे सीखने के लिए प्रेरित किया।उन्होंने कहा कि ध्यान और आध्यात्मिक अभ्यास व्यक्ति को मुश्किल परिस्थितियों से निपटने में मानसिक मजबूती दे सकते हैं। केजरीवाल ने आर्ट ऑफ लिविंग के 45 वर्ष पूरे होने पर श्री श्री रविशंकर और संस्था से जुड़े लोगों को बधाई भी दी।
भगवंत मान ने आश्रम के माहौल को बताया खास अनुभव
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने श्री श्री रविशंकर के साथ मुलाकात और आश्रम के शांत वातावरण में समय बिताने को विशेष अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि यहां ध्यान और आध्यात्मिक गतिविधियों से उन्हें आंतरिक शांति का अनुभव हुआ। मान ने पंजाब की सामाजिक और ऐतिहासिक भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य की पहचान देश की व्यापक संस्कृति से गहराई से जुड़ी रही है। उन्होंने सामाजिक समानता, सांप्रदायिक सौहार्द और भाईचारे को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने खास तौर पर युवाओं के बीच नैतिक और सामाजिक मूल्यों को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने कहा कि युवाओं को सकारात्मक दिशा देने में आध्यात्मिक शिक्षाओं की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।
सिसोदिया ने जेल के अनुभव से जोड़ा सुदर्शन क्रिया का किस्सा
मनीष सिसोदिया ने अपने संबोधन में सुदर्शन क्रिया सीखने के अनुभव को साझा किया। उन्होंने बताया कि जेल में रहने के दौरान ध्यान और आध्यात्मिक साहित्य से उनका जुड़ाव बढ़ा। वहां उन्हें श्री श्री रविशंकर की किताबें पढ़ने का अवसर मिला, जिसके बाद उनकी रुचि आध्यात्मिक अभ्यासों में और गहरी हुई। सिसोदिया के मुताबिक, ध्यान और सुदर्शन क्रिया ने उन्हें जेल में बिताए करीब 18 महीनों के दौरान मानसिक रूप से मजबूत बने रहने में मदद की। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में मानसिक संतुलन बनाए रखने में इन अभ्यासों का उन्हें लाभ मिला।
स्कूलों में ध्यान को शिक्षा का हिस्सा बनाने की वकालत
मनीष सिसोदिया ने बच्चों की शिक्षा में ध्यान को शामिल करने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्कूली शिक्षा के साथ बच्चों के मानसिक विकास और आंतरिक मजबूती पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने पंजाब के स्कूलों में ध्यान को लेकर किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि कई स्कूलों में बच्चों के दिन की शुरुआत ध्यान के साथ की जा रही है। उनके अनुसार, इससे छात्रों के आत्मविश्वास, मानसिक तैयारी और पढ़ाई के प्रति एकाग्रता में सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं। सिसोदिया ने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था में ऐसा मॉडल विकसित किया जाना चाहिए, जिसमें बच्चों को अकादमिक शिक्षा के साथ मानसिक शांति और आत्मिक मजबूती विकसित करने का अवसर भी मिले।
45 साल की सेवा के लिए आर्ट ऑफ लिविंग को दी बधाई
कार्यक्रम के दौरान तीनों नेताओं ने आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन की 45 वर्षों की सेवा यात्रा की सराहना की। उन्होंने संस्था की समाज कल्याण, शिक्षा, मानसिक शांति और नशा मुक्ति समेत विभिन्न क्षेत्रों में किए जा रहे कार्यों का उल्लेख किया। नेताओं ने पंजाब और पूरे देश की तरक्की, शांति और समृद्धि की कामना की। कार्यक्रम में सामाजिक एकता, भाईचारे और शांतिपूर्ण समाज के निर्माण में आध्यात्मिकता एवं शिक्षा की भूमिका को भी रेखांकित किया गया।




