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CJI गवई पर जूता फेंकने वाले वकील राकेश किशोर का बयान- “न पछतावा, न माफी… मेरे दिल को चोट लगी थी

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी.आर. गवई पर जूता फेंकने वाले वकील राकेश किशोर ने अब चुप्पी तोड़ दी है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि उसे अपने किए पर न कोई पछतावा है, न ही वह माफी मांगेगा। बता दें 6 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट की कोर्ट नंबर-1 में सुनवाई के दौरान राकेश किशोर ने CJI गवई की ओर जूता फेंकने की कोशिश की थी। हालांकि जूता निशाने पर नहीं लगा। घटना के बाद उसने “जय सनातन धर्म” के नारे लगाए। CJI गवई ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, जबकि सुरक्षा कर्मियों ने राकेश को तुरंत हिरासत में ले लिया।

बाद में सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने राकेश के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने से इनकार कर दिया, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें रिहा कर दिया और उसका जूता भी लौटा दिया। हालांकि, बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने राकेश किशोर को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए कहा कि अब वह देश में कहीं भी वकालत नहीं कर सकेगा। साथ ही उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।

रिहा होने के बाद राकेश किशोर ने मीडिया से कहा – “मैं नशे में नहीं था और न ही मुझे डर लग रहा था। मैं बहुत आहत था, मेरे दिल को गहरी चोट लगी थी। कोर्ट में जो हुआ, उसका मुझे कोई पछतावा नहीं है।” उन्होंने आरोप लगाया कि 16 सितंबर 2025 को CJI गवई की अदालत में एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने कथित तौर पर सनातन धर्म का मजाक उड़ाया। राकेश के मुताबिक, “मुख्य न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता से कहा – ‘जाओ, मूर्ति से प्रार्थना करो कि वो तुम्हारा सिर वापस लगा दे।’ क्या ऐसे होती है सनातन धर्म से जुड़े मामलों की सुनवाई? राहत न दो, लेकिन आस्था का मजाक तो मत उड़ाओ।”

उसने आगे कहा, “जो व्यक्ति देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर है, उसे उस पद की गरिमा बनाए रखनी चाहिए। अगर उन्हें ‘माईलॉर्ड’ कहा जाता है तो उस शब्द के अर्थ और आदर को समझना चाहिए। मॉरीशस में उन्होंने कहा कि ‘भारत बुलडोज़र से नहीं चलेगा’, तो मैं पूछना चाहता हूं क्या योगी आदित्यनाथ सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाकर गलत कर रहे हैं?”राकेश किशोर ने कहा कि वह अपने कदम पर अडिग है – “न मैं माफी मांगूंगा, न मुझे अफसोस है। न्यायाधीशों को संवेदनशील होना चाहिए। मन बहुत दुखी है, इसलिए मैंने जो किया, वह अपने धर्म और आत्मसम्मान की रक्षा के लिए किया।”

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BRIJESH SINGH
the authorBRIJESH SINGH