अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच अब नई विशेष जांच टीम (SIT) करेगी। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने बताया कि 25 जुलाई को नई एसआईटी का गठन कर दिया गया है। सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को जानकारी दी कि नई टीम पूरे मामले की विस्तृत जांच करेगी।
नई एसआईटी की कमान आईजी किरण एस को सौंपी गई है। टीम में उनके अलावा डीआईजी और एसपी रैंक के दो पुलिस अधिकारी शामिल हैं। वित्तीय लेनदेन की गहन जांच के लिए एक चार्टर्ड अकाउंटेंट को भी टीम का सदस्य बनाया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए सुझाव दिया कि जांच में एक फोरेंसिक ऑडिटर को भी शामिल किया जाए, जिस पर राज्य सरकार ने सहमति जताई। अदालत ने एसआईटी को दो सप्ताह के भीतर यथास्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के सुझाव के बाद बनी नई SIT
इस मामले की पिछली सुनवाई 20 जुलाई को हुई थी। तब सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि शुरुआती जांच करने वाली एसआईटी का दायरा सीमित था और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए नई एसआईटी का गठन किया जाना चाहिए। अदालत ने यह भी सुझाव दिया था कि वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के नेतृत्व में नई टीम बनाई जाए।
सुनवाई के दौरान तुषार मेहता ने अदालत को बताया था कि पहली एसआईटी का उद्देश्य केवल यह पता लगाना था कि कोई संज्ञेय अपराध हुआ है या नहीं। शुरुआती जांच में अपराध के संकेत मिलने के बाद एफआईआर दर्ज की गई। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने विस्तृत जांच के लिए अलग एसआईटी गठित करने की आवश्यकता जताई थी।
राम मंदिर में धार्मिक व्यवस्थाओं के लिए बनी स्थायी समिति
इधर, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर में पूजा-पाठ, धार्मिक परंपराओं और वैदिक रीति-रिवाजों की देखरेख के लिए नौ सदस्यीय स्थायी धार्मिक समिति का गठन किया है। ट्रस्ट की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। महंत गोविंद देव गिरि की अध्यक्षता वाली यह समिति मंदिर की दैनिक पूजा व्यवस्था, प्रमुख धार्मिक आयोजनों, पुजारियों की नियुक्ति और प्रशिक्षण, तथा पारंपरिक पूजा पद्धति से जुड़े मामलों पर अंतिम निर्णय लेगी। समिति में देश के कई प्रमुख संत, शंकराचार्य, रामानंदी परंपरा के महंत और धर्मग्रंथों के विद्वानों को शामिल किया गया है।




