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परेश रावल की फिल्म ‘द ताज स्टोरी’ रिलीज से पहले विवादों में, एक्टर ने दिया स्पष्टीकरण

परेश रावल की आगामी फिल्म ‘द ताज स्टोरी’ 31 अक्टूबर को रिलीज होने वाली है, लेकिन इसके प्रदर्शन से पहले ही यह विवादों में घिर गई है। फिल्म को लेकर कई आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं, जिनमें आरोप लगाया गया है कि यह इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करती है। अब खुद परेश रावल ने इन विवादों पर प्रतिक्रिया दी है और फिल्म की मंशा को लेकर अपनी बात रखी है।

फिल्म की कहानी विष्णु दास ताज नाम के एक गाइड के इर्द-गिर्द घूमती है, जो ताजमहल के पीछे छिपे सच्चे इतिहास को जानने की कोशिश करता है। परेश रावल ने बताया कि फिल्म वास्तुकला और ताजमहल के निर्माण से जुड़े कई कम ज्ञात तथ्यों को उजागर करती है।परेश रावल ने ANI से बातचीत में कहा, “यह फिल्म ताज की वास्तुकला और उसके ट्रांसफॉर्मेशन के बारे में है। इसमें कई गलतफहमियों और अफवाहों को स्पष्ट किया गया है जैसे कि 22,000 लोगों के हाथ काटे जाने जैसी कहानियां। हमारा उद्देश्य सच्चाई को सामने लाना है।”

उन्होंने आगे कहा कि विवादों का असर समाज के ताने-बाने पर पड़ता है। रावल के अनुसार, “ऐसे विवाद भारत जैसे देश की सामाजिक एकता को नुकसान पहुंचाते हैं। हम केवल तथ्यों को उनके मूल स्रोतों से प्रस्तुत कर रहे हैं ताकि गलत धारणाओं को दूर किया जा सके।”

फिल्म में वकील का किरदार निभा रहे अभिनेता जाकिर हुसैन ने भी इस पर अपनी राय दी। उन्होंने कहा, “कुछ विषय स्वभाविक रूप से विवाद पैदा करते हैं। ताजमहल से जुड़ी ऐतिहासिक घटनाएं 16वीं शताब्दी से कई किताबों में दर्ज हैं। समय के साथ इन घटनाओं की व्याख्या बदल गई है। हमारी कोशिश है कि दर्शकों के सामने एक स्वस्थ बहस पेश की जाए।

क्यों बढ़ा विवाद

‘द ताज स्टोरी’ को लेकर दायर एक जनहित याचिका (PIL) में आरोप लगाया गया है कि यह फिल्म मनगढ़ंत तथ्यों पर आधारित है और सांप्रदायिक भावनाओं को भड़काने का प्रयास करती है। याचिका में कहा गया है कि ट्रेलर में ताजमहल के गुंबद के ऊपर भगवान शिव की आकृति दिखाई गई है, जिससे यह संदेश जाता है कि स्मारक मूल रूप से एक मंदिर था।दिल्ली हाई कोर्ट ने इस याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। हालांकि, विवाद के बावजूद फिल्म तय समय पर रिलीज होने की संभावना है।‘द ताज स्टोरी’ अपने विषय और प्रस्तुतिकरण को लेकर चर्चाओं में है, और देखना यह होगा कि रिलीज के बाद दर्शक इसे किस दृष्टि से देखते हैं।

BRIJESH SINGH
the authorBRIJESH SINGH