RegionalTop News

बिहार में 2037 तक ‘विकसित बिहार’ का रोडमैप, CM सम्राट चौधरी बोले- गांवों से आए विकास की रणनीति पर सुझाव

पटना: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य को 2037 तक समृद्ध और विकसित बनाने के लक्ष्य पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि विकास की नीतियां सिर्फ ऊपर से तय नहीं होनी चाहिए, बल्कि गांवों और स्थानीय संस्थाओं से भी सुझाव लिए जाने चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2037 बिहार के लिए अहम साल होगा, क्योंकि इसी वर्ष राज्य के गठन के 125 साल पूरे होंगे। पटना में आयोजित ‘ग्राम संसद बिहार चैप्टर’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सम्राट चौधरी ने कहा कि देश के विकास के बड़े लक्ष्यों को हासिल करने में ग्राम स्तर की संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि स्थानीय निकायों को नीतियों और प्रशासनिक रणनीतियों को लेकर अपने सुझाव सामने रखने चाहिए।

‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य से जोड़ने पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को आगे बढ़ाने में ग्राम संसद की भी महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। उन्होंने कहा कि बिहार को लेकर भी दीर्घकालिक सोच के साथ काम करने की जरूरत है। सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी समृद्ध बिहार का सपना देखा था। अब 2037 को एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानते हुए यह तय करना होगा कि आने वाले वर्षों में राज्य को आर्थिक और सामाजिक रूप से कैसे मजबूत बनाया जाए।

‘मुखिया’ को बताया जमीनी स्तर पर सबसे अहम कड़ी

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने देश की त्रिस्तरीय लोकतांत्रिक व्यवस्था का जिक्र करते हुए स्थानीय जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारियों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि आमतौर पर सत्ता के तीन स्तरों की चर्चा प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी के तौर पर की जाती है, लेकिन गांव में सबसे ज्यादा प्रत्यक्ष जिम्मेदारियां स्थानीय प्रमुख के पास होती हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुखिया के फैसलों और कामकाज का सीधा असर गांव और वहां रहने वाले लोगों पर पड़ता है। उनके मुताबिक, स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधि समुदाय की रोजमर्रा की जरूरतों और विकास कार्यों से सीधे जुड़े होते हैं।

विधानसभा-लोकसभा से अलग है पंचायत चुनाव की चुनौती

सम्राट चौधरी ने पंचायत स्तर की राजनीति को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि बड़े चुनावों की तुलना में गांव के स्तर पर चुनाव लड़ना कई मायनों में ज्यादा चुनौतीपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि विधायक या सांसद का चुनाव लड़ना एक तरह की राजनीतिक चुनौती है, लेकिन जैसे-जैसे राजनीति का स्तर नीचे आता है, स्थानीय स्तर पर लोगों के बीच सीधे संपर्क और जवाबदेही बढ़ जाती है। इसी वजह से मुखिया का चुनाव भी अपने आप में कठिन राजनीतिक मुकाबला होता है।

‘विकसित बिहार’ पर विचार-मंथन, प्रतिभाओं का सम्मान

इससे एक दिन पहले मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना स्थित बापू सभागार में ‘विकसित बिहार: नींव से निर्माण तक’ विषय पर आयोजित विचार-मंथन सत्र का उद्घाटन किया था। इसी कार्यक्रम में ‘लव-कुश प्रतिभा सम्मान समारोह’ भी आयोजित किया गया, जिसमें अलग-अलग क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रदर्शन करने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया।कार्यक्रम का आयोजन प्रोग्रेसिव इंटेलेक्चुअल्स एसोसिएशन, बिहार की ओर से किया गया था। मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की।

लव-कुश समुदाय की एकता का भी किया जिक्र

मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, सम्राट चौधरी ने लव-कुश समुदाय की सामाजिक एकता का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस एकता की नींव 1994 में रखी गई थी और आज भी यह कायम है। उन्होंने कहा कि लव-कुश समुदाय किसी के विरोध में नहीं है, बल्कि न्याय और सामाजिक एकता के संकल्प के साथ बिहार की समृद्धि और देश के विकास में योगदान देने की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है।

BRIJESH SINGH
the authorBRIJESH SINGH