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SIR पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर, वोटर लिस्ट अपडेट करना चुनाव आयोग का संवैधानिक अधिकार

सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर बड़ा फैसला सुनाते हुए चुनाव आयोग की प्रक्रिया को सही ठहराया है। चीफ जस्टिस Surya Kant और जस्टिस जयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि मतदाता सूची को अपडेट करना स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की प्रक्रिया का अहम हिस्सा है और यह चुनाव आयोग का संवैधानिक दायित्व भी है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि जिन लोगों के नाम ‘संदिग्ध नागरिकता’ के आधार पर वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, उनकी सूची 4 हफ्तों के भीतर केंद्र सरकार को भेजी जाए।

SIR प्रक्रिया को कोर्ट ने बताया वैध

अदालत ने कहा कि केवल इसलिए SIR प्रक्रिया को अवैध नहीं कहा जा सकता क्योंकि यह सामान्य वोटर वेरिफिकेशन प्रक्रिया से अलग है। कोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग के पास जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 के तहत मतदाता सूची के पुनरीक्षण और संशोधन का पूरा अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि SIR प्रक्रिया के दौरान लोगों को जानकारी सुधारने, दस्तावेज जमा करने और आपत्ति या अपील करने के पर्याप्त अवसर दिए गए। दस्तावेज मांगने का मतलब यह नहीं है कि किसी व्यक्ति को नागरिक नहीं माना जा रहा।

सही वोटर लिस्ट निष्पक्ष चुनाव की नींव’

सर्वोच्च अदालत ने कहा कि निष्पक्ष चुनाव सिर्फ मतदान तक सीमित नहीं होते, बल्कि उसकी सबसे मजबूत नींव सही और भरोसेमंद मतदाता सूची होती है। ऐसे में वोटर लिस्ट को अपडेट करना गलत नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि चुनाव आयोग नागरिकता तय नहीं करता, बल्कि केवल यह देखता है कि किसी व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट में रखा जाए या हटाया जाए। हालांकि यदि उपलब्ध दस्तावेजों से नागरिकता पर संदेह होता है तो आयोग कार्रवाई कर सकता है।

SIR नियमों को बताया संतुलित और वाजिब

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि SIR के तहत नोटिस जारी करना, जानकारी सार्वजनिक करना, संदिग्ध मामलों की व्यक्तिगत जांच और अपील का अधिकार जैसी व्यवस्थाएं पूरी तरह उचित हैं। अदालत के मुताबिक, दस्तावेजों की सूची भी ऐसी रखी गई है जो आमतौर पर लोगों के पास उपलब्ध होती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि SIR का उद्देश्य लोगों को वोटर लिस्ट से बाहर करना नहीं, बल्कि मतदाता सूची को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाना है।

कई राज्यों में पूरी हो चुकी है प्रक्रिया

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने 29 जनवरी को इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया था। अदालत ने SIR प्रक्रिया पर कोई रोक नहीं लगाई थी। बिहार, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और पश्चिम बंगाल में यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि उत्तर प्रदेश, गुजरात और राजस्थान समेत कई राज्यों में अभी जारी है।

कई नेताओं और संगठनों ने दाखिल की थीं याचिकाएं

इन याचिकाओं में Association for Democratic Reforms, राजनीतिक विश्लेषक योगेंद्र यादव , महुआ मोइत्रा , मनोज झा , K. C. वेणुगोपाल और सुप्रिया सुले समेत कई नेताओं और संगठनों के नाम शामिल थे। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को आधार कार्ड को पहचान प्रमाण के रूप में स्वीकार करने का निर्देश भी दिया था। हालांकि अदालत ने साफ किया था कि आधार कार्ड नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जाएगा।

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BRIJESH SINGH
the authorBRIJESH SINGH