तहलका पत्रिका के पूर्व प्रधान संपादक और वरिष्ठ पत्रकार तरुण तेजपाल को वर्ष 2013 के रेप मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने 10 साल के कठोर कारावास की सज़ा सुनाई है। अदालत ने उनके ऊपर कुल 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यह मामला उनकी एक जूनियर सहयोगी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत से जुड़ा है।
सज़ा सुनाते हुए अदालत ने कहा कि उसने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया है। तेजपाल के वकील आबाद पोंडा ने अदालत से न्यूनतम सज़ा की मांग करते हुए कहा कि यह उनके मुवक्किल का पहला आपराधिक मामला है। उन्होंने दलील दी कि घटना 2013 की है, 2022 से अपील लंबित थी, आरोपी जमानत की सभी शर्तों का पालन करता रहा है और उसका पासपोर्ट भी अधिकारियों के पास जमा है।
कोर्ट में क्या हुआ?
सुनवाई के दौरान तरुण तेजपाल ने अदालत से सरेंडर के लिए 8 सप्ताह का समय देने की मांग की। उन्होंने खुद को राजनीतिक प्रतिशोध का शिकार बताया। वहीं, सॉलिसिटर जनरल ने अदालत से अधिकतम सज़ा देने की मांग करते हुए कहा कि आरोपी पीड़िता के लिए अभिभावक जैसी स्थिति में था। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि स्पष्ट विरोध के बावजूद अपराध दोहराया गया और आरोपी ने अपने कृत्य पर कभी पछतावा नहीं जताया।
कोर्ट की टिप्पणी
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यह घटना करीब 13 साल पुरानी है। इसके बाद से आरोपी के खिलाफ किसी अन्य दुराचार या आपराधिक आरोप की कोई रिपोर्ट सामने नहीं आई। कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि दोनों पक्ष अपने-अपने जीवन में आगे बढ़ चुके हैं।
तरुण तेजपाल को मिली सज़ा
- धारा 376(2)(f) के तहत 10 वर्ष का कठोर कारावास और 5 लाख रुपये का जुर्माना।
- धारा 376(2)(k) के तहत 10 वर्ष का कठोर कारावास और 5 लाख रुपये का जुर्माना।
- धारा 354 के तहत 1 वर्ष का कठोर कारावास और 10,000 रुपये का जुर्माना।
- धारा 354A के तहत 1 वर्ष का कठोर कारावास और जुर्माना।
कौन हैं तरुण तेजपाल?
तरुण तेजपाल तहलका पत्रिका के पूर्व प्रधान संपादक और वरिष्ठ पत्रकार रहे हैं। वर्ष 2013 में उनकी एक जूनियर सहकर्मी ने उन पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। शिकायत के बाद उनके खिलाफ मामला दर्ज हुआ और उन्हें जेल भी जाना पड़ा। अब बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस मामले में उन्हें 10 वर्ष के कठोर कारावास की सज़ा सुनाई है।




