कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को बड़ा झटका लगा है। गुवाहाटी हाईकोर्ट ने उनकी अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। इसके बाद उनके खिलाफ गिरफ्तारी की आशंका और बढ़ गई है। यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां शर्मा की शिकायत से जुड़ा है। खेड़ा पर आरोप है कि उन्होंने रिंकी भुइयां के खिलाफ गंभीर और आपत्तिजनक आरोप लगाए थे, जिसके बाद उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया।
तीन घंटे चली बहस, फिर सुरक्षित रखा फैसला
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति पार्थिव ज्योति सैकिया की एकल पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें करीब तीन घंटे तक सुनीं और इसके बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। मंगलवार को कोर्ट ने अपना आदेश सुनाते हुए खेड़ा की याचिका खारिज कर दी। खेड़ा की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि उनके मुवक्किल के देश छोड़कर भागने का कोई खतरा नहीं है और गिरफ्तारी की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है।
सरकार का सख्त रुख
वहीं असम सरकार की ओर से महाधिवक्ता देवजीत लोन सैकिया ने कोर्ट में कड़ा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ मानहानि का मामला नहीं, बल्कि इसमें धोखाधड़ी और जालसाजी जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। ऐसे में खेड़ा को कोई राहत नहीं दी जानी चाहिए।
पहले मिली थी ट्रांजिट जमानत
इससे पहले तेलंगाना हाईकोर्ट ने खेड़ा को सात दिन की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश पर रोक लगा दी। दरअसल, पवन खेड़ा ने रिंकी भुइयां पर कई पासपोर्ट और विदेश में अघोषित संपत्तियों के आरोप लगाए थे, जिसके बाद यह पूरा विवाद शुरू हुआ। अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद इस मामले में कानूनी लड़ाई और तेज होने के आसार हैं।




