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सिक्किम टनल हादसा: अब तक 20 मजदूरों की मौत, पांच अभी भी लापता, राहत अभियान जारी

सिक्किम के नामची जिले में निर्माणाधीन सुरंग में हुए भीषण हादसे के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार दूसरे दिन भी जारी है। भारी भूस्खलन के चलते सुरंग का प्रवेश मार्ग मलबे से बंद हो गया, जिससे अंदर मौजूद कई मजदूर फंस गए। प्रशासन के अनुसार, अब तक 20 श्रमिकों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई अन्य की तलाश जारी है।

नामची के पुलिस अधीक्षक सोनम डी. भूटिया ने बताया कि अब तक 12 शव बाहर निकाले जा चुके हैं। इनमें से सात मृतकों की पहचान कर ली गई है, जबकि बाकी की पहचान की प्रक्रिया जारी है। अधिकारियों के मुताबिक, पांच श्रमिक अभी भी लापता हैं और उनके संभावित स्थानों पर सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।

मीथेन गैस और विस्फोट के बाद बिगड़े हालात

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सुरंग के भीतर बड़ी मात्रा में मीथेन गैस जमा हो गई थी। गैस को बाहर निकालने की प्रक्रिया के दौरान अचानक विस्फोट हुआ, जिसके बाद भूस्खलन ने सुरंग के बड़े हिस्से को मलबे में दबा दिया। हादसे के समय कुछ मजदूर सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे, लेकिन कई श्रमिक भीतर ही फंस गए। फिलहाल बचाव दल सुरंग के लगभग 200 मीटर हिस्से में अभियान चला रहे हैं, जहां मजदूरों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है।

बचाव कार्य में कई मुश्किलें

राहत अभियान के सामने सबसे बड़ी चुनौती सुरंग के भीतर मीथेन गैस की मौजूदगी, ऑक्सीजन का कम स्तर और बेहद संकरा रास्ता है। कम दृश्यता और लगातार जोखिम के बीच एनडीआरएफ, एसडीआरएफ तथा स्थानीय प्रशासन की टीमें पूरी सावधानी के साथ अभियान चला रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि बचाव दल आधुनिक उपकरणों की मदद से सुरंग के भीतर सुरक्षित पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि फंसे हुए लोगों तक जल्द से जल्द पहुंचा जा सके।

प्रधानमंत्री ने जताया शोक, मुआवजे का ऐलान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि इस दुर्घटना में जान गंवाने वाले प्रत्येक श्रमिक के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। वहीं, घायलों को 50 हजार रुपये की मदद देने की घोषणा की गई है।

NHPC परियोजना में हो रहा था निर्माण

हादसा उस सुरंग में हुआ, जिसका निर्माण NHPC की तीस्ता स्टेज-VI जलविद्युत परियोजना के तहत किया जा रहा था। निर्माण कार्य का जिम्मा पटेल इंजीनियरिंग कंपनी के पास है।गौरतलब है कि सिक्किम का पहाड़ी इलाका भूस्खलन और प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। लगातार बारिश और अस्थिर भू-भाग के कारण यहां इस तरह की घटनाओं का खतरा बना रहता है। प्रशासन का कहना है कि बचाव अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक सभी फंसे मजदूरों तक पहुंच नहीं बनाई जाती।

BRIJESH SINGH
the authorBRIJESH SINGH