बरसात में बेघर न हों परिवार, बीजेपी नेता डॉ. रोहित सक्सेना ने प्रशासन से तीन माह की मोहलत की मांग की
छावनी विधानसभा क्षेत्र सुलभ नंबर 35 मीरपुर कैंट में प्रस्तावित कार्रवाई को लेकर स्थानीय निवासियों के बीच बढ़ती चिंता के बीच बीजेपी नेता डॉ. रोहित सक्सेना ने प्रभावित परिवारों के पक्ष में मानवीय पहल करते हुए प्रशासन से तीन माह की मोहलत देने की मांग की है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को लिखित पत्र देकर अनुरोध किया है कि बरसात के मौसम को देखते हुए किसी भी परिवार को तत्काल बेघर न किया जाए तथा मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए उन्हें वैकल्पिक व्यवस्था के लिए पर्याप्त समय दिया जाए।

डॉ. रोहित सक्सेना ने कहा कि पिछले एक दशक से अधिक समय से छावनी विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व विपक्षी दलों के पास रहा। उनके अनुसार वर्षों तक वोट बैंक की राजनीति के कारण अवैध बस्तियां बसती रहीं, लेकिन अब जब प्रशासन अपनी भूमि वापस लेने की कार्रवाई कर रहा है, तब स्थानीय लोगों को उनके चुने हुए जनप्रतिनिधियों का अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा।

उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित जनप्रतिनिधि सरकार में न होने का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से बच रहे हैं, जबकि वे वेतन, विधायक निधि तथा अन्य सभी सुविधाओं का लाभ निरंतर प्राप्त कर रहे हैं। उनका कहना था कि यदि जनता के प्रति वास्तविक संवेदनशीलता होती तो केवल बयान देने के बजाय प्रभावित परिवारों को राहत दिलाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाते।

उन्होंने कहा कि संभव है भविष्य में इस क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी को राजनीतिक लाभ न मिले, फिर भी संकट की घड़ी में लोगों के साथ खड़ा होना ही भाजपा कार्यकर्ता का दायित्व है। उनके अनुसार राजनीति से ऊपर मानवता को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
डॉ. सक्सेना ने बताया कि उन्होंने संबंधित विभाग को लिखित रूप से अनुरोध किया है कि कम से कम तीन माह का समय दिया जाए ताकि बरसात समाप्त होने तक लोग सम्मानपूर्वक अपनी वैकल्पिक व्यवस्था कर सकें। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी अवैध कब्जे का समर्थन करना नहीं, बल्कि मानवीय आधार पर प्रभावित परिवारों को तत्काल बेघर होने से बचाना है।

डॉ. रोहित सक्सेना ने स्थानीय नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि वे ऐसे जनप्रतिनिधि का चयन करें जो कठिन समय में जनता के साथ खड़ा रहे, न कि ऐसा व्यक्ति जो वेतन, विधायक निधि और अन्य सुविधाएं तो ले, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर केवल सरकार का बहाना बनाकर अपनी जिम्मेदारी से पीछे हट जाए। उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में जनता की चिंता होती तो जनप्रतिनिधि केवल बयान देने तक सीमित न रहते बल्कि प्रभावित लोगों के लिए ठोस प्रयास करते। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उनका प्रयास रहेगा कि बरसात के मौसम में किसी भी परिवार को बेघर न होना पड़े और प्रशासन मानवीय संवेदनाओं को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय ले।





