अनिल अंबानी को बड़ा झटका देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने बैंक ऑफ बड़ौदा, इंडियन ओवरसीज बैंक और IDBI बैंक द्वारा उनके लोन अकाउंट्स को ‘फ्रॉड’ घोषित किए जाने पर रोक लगाने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली शामिल थे, ने कहा कि बॉम्बे हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच के फैसले में दखल देने का कोई ठोस आधार नहीं है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि हाई कोर्ट की टिप्पणियों का असर बैंकों के खिलाफ लंबित मुकदमे के अंतिम निर्णय पर नहीं पड़ेगा।
सुनवाई के दौरान अंबानी की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि उनके क्लाइंट बैंकों के साथ समझौता करना चाहते हैं। वहीं, बैंकों की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस पर आपत्ति जताई। अदालत ने सिब्बल का बयान रिकॉर्ड पर लिया, लेकिन इस पर कोई राय देने से इनकार कर दिया। साथ ही, कोर्ट ने ट्रायल को तेजी से आगे बढ़ाने का निर्देश दिया और कहा कि अंबानी के लिए कानूनी विकल्प अभी भी खुले हैं।
दरअसल, यह मामला फरवरी में बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा दिए गए उस फैसले से जुड़ा है, जिसमें सिंगल बेंच द्वारा दिया गया स्टे हटा दिया गया था। यह स्टे बैंकों को अंबानी के खातों को ‘फ्रॉड’ घोषित करने से रोक रहा था। सिंगल बेंच ने पहले फोरेंसिक ऑडिट (BDO इंडिया LLP) के आधार पर राहत दी थी, लेकिन डिवीजन बेंच ने इसे ‘अवैध और विकृत’ करार देते हुए बैंकों को आगे की कार्रवाई की अनुमति दे दी। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बैंकों के लिए अनिल अंबानी के लोन अकाउंट्स को ‘फ्रॉड’ घोषित करने की प्रक्रिया पर कोई न्यायिक रोक नहीं रह गई है।




