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वाराणसी की गंज शहीदा मस्जिद पर कार्रवाई रोकने की मांग, सांसद मोहिब्बुल्लाह नदवी ने रेल मंत्री को लिखा पत्र

रामपुर से सांसद मोहिब्बुल्लाह नदवी ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र भेजकर वाराणसी के काशी रेलवे स्टेशन के निकट स्थित ऐतिहासिक गंज शहीदा मस्जिद को हटाने की प्रस्तावित कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। सांसद ने कहा कि यह मामला केवल भूमि विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि कानून के शासन, संवैधानिक अधिकारों, धार्मिक विरासत के संरक्षण और प्रशासनिक निष्पक्षता से भी जुड़ा हुआ है।

अपने पत्र में नदवी ने दावा किया कि मस्जिद पर जो नोटिस चस्पा किया गया, उसमें न तो तारीख अंकित थी, न किसी अधिकारी के हस्ताक्षर, पदनाम या विभागीय मुहर थी। उनका कहना है कि सदियों पुराने धार्मिक स्थल से संबंधित किसी भी कार्रवाई को कानूनी प्रक्रिया और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप ही किया जाना चाहिए।

सांसद ने मस्जिद कमेटी के हवाले से कहा कि गंज शहीदा मस्जिद का उल्लेख वर्ष 1883-84 के सेटलमेंट मैप और पुराने राजस्व अभिलेखों में मिलता है। उन्होंने दावा किया कि उपलब्ध ऐतिहासिक रिकॉर्ड के अनुसार मस्जिद का अस्तित्व हिजरी 1034 (1624-25 ईस्वी) से जुड़ा हुआ है, जिससे इसकी लगभग 400 वर्ष पुरानी विरासत का संकेत मिलता है।

रेल प्रशासन द्वारा संदर्भित सिविल सूट संख्या 1174/1991 का उल्लेख करते हुए सांसद ने कहा कि यह मुकदमा मस्जिद के अस्तित्व या स्वामित्व से नहीं, बल्कि आसपास की भूमि से जुड़े विवाद से संबंधित था। उनके अनुसार, मुकदमा प्रक्रियागत कारणों से खारिज हुआ था, इसलिए इसे मस्जिद की कानूनी स्थिति पर अंतिम निर्णय नहीं माना जा सकता।

पत्र में संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 का हवाला देते हुए धार्मिक स्वतंत्रता और धार्मिक संस्थाओं के अधिकारों की बात कही गई है। साथ ही, Places of Worship Act, 1991 का उल्लेख करते हुए कहा गया कि इस कानून का उद्देश्य देश में सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखना और धार्मिक स्थलों के ऐतिहासिक स्वरूप की रक्षा करना है।

मोहिब्बुल्लाह नदवी ने कहा कि विकास और आधारभूत ढांचा विस्तार देश की जरूरत है, लेकिन यह प्रक्रिया संवैधानिक मूल्यों, ऐतिहासिक तथ्यों और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप होनी चाहिए। उन्होंने रेल मंत्री से गंज शहीदा मस्जिद के खिलाफ किसी भी तरह की विध्वंसात्मक या जबरन कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने तथा भूमि स्वामित्व और कानूनी स्थिति की स्वतंत्र समीक्षा कराने की मांग की है।

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BRIJESH SINGH
the authorBRIJESH SINGH