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रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने यूक्रेन पर 44 टन वजनी परमाणु बम गिराने का दिया आदेश, यूक्रेन राष्ट्रपति ने पश्चिमी देशों से मांगी मदद

यूक्रेनः इस समय पूरी दुनिया की निगाहें रूस और यूक्रेन पर लगी हुई हैं। यूक्रेन की सीमा पर रूसी सैनिक लगातार जमा हो रहे हैं। युद्ध की आशंका के बीच म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने पश्चिमी देशों से रूस के प्रति तुष्टिकरण की नीति को छोड़ने की अपील भी की। दुनिया को आगाह करते हुए कहा कि सूचना मिली है कि रूस यूक्रेन पर बम से हमला कर सकता है।

रक्षा सूत्रों के हवाले से मिला जानकारी के मुताबिक, रूसी राष्ट्रपति व्लामिदिर पुतिन ने यूक्रेन में 44-टन वजन वाला परमाणु हथियार को इस्तेमाल करने का आदेश दिया है। गौरतलब है कि नाटो ने हाल ही में चेतावनी दी है कि मास्को किसी भी समय यूक्रेन पर हमला करने की योजना बना रहा है। 44-टन वजनी इस बम को ‘फादर ऑफ ऑल बम’ कहा जाता है। इससे पहले इस बम को सीरिया के डीर एज़-ज़ोर में गिराया गया था। इस बम में 44 टन से अधिक टीएनटी के बराबर विस्फोट होता है. इसे एक जेट से गिराया जाता है, गिराए जाने के बाद यह हवा के बीच में विस्फोट करता है। इसका सबसे अधिक नुकसान सुपरसोनिक शॉकवेव और अत्यधिक उच्च तापमान से होता है।

सूत्रों के मुताबिक, कथित तौर पर इसका इस्तेमाल सीरिया में किया गया था। इस बम का प्रभाव बेहद विनाशकारी होगा। इससे लोग बड़े पैमाने पर न केवल मरेंगे बल्कि यह बम टैंकों को भी नुकसान पहुंचाएगा।

इससे पहले जंग जैसे हालातों के बीच रूस ने परमाणु बम दागने वाली अपनी महाविनाशक तोप को खारकीव शहर के पास वेसेला में तैनात किया है। रूस की यह टूएससेवन पिऑन तोप करीब 37 किलोमीटर की दूरी तक परमाणु बम से भरे गोले दाग सकती है। इस तोप को सोवियत एटामिक तोप के नाम से भी जाना जाता है। रूस ने इन तोपों की तैनाती ऐसे समय पर की है जब पुतिन ने चेतावनी दी है कि अगर यूक्रेन नाटो में शामिल होता है तो दुनिया में परमाणु युद्ध छिड़ सकता है।

वहीं यूक्रेन सीमा पर रूसी सैनिकों के जमावड़े के बाद अमेरिका और पश्चिमी देश एकजुट हो गए हैं। क्षेत्र में युद्ध के हालात के बीच अमेरिका ने परमाणु बम गिराने का अभ्यास शुरू किया है। यह ग्लोबल लाइटनिंग अभ्यास, अमेरिकी एटमी हथियारों का जिम्मा संभालने वाले रणनीतिक कमांड ने शुरू किया है जिसका मकसद अमेरिकी सैन्य तैयारियों को परखना है।

यह सैन्य अभ्यास ऐसे वक्त में शुरू किया गया है जब बाल्टिक सागर में रूसी नौसेना अपने जंगी जहाजों के साथ यहां जोरदार युद्धाभ्यास कर रही है। रूस ने क्षेत्र में एक लाख से ज्यादा सैनिक तैनात कर रखे हैं। अब दोनों तरफ से सैन्य जमावड़े के कारण क्षेत्रीय हालात बेहद तनावपूर्ण हैं। इससे पहले अप्रैल 2021 में अमेरिका के आखिरी बार हुए ग्लोबल लाइटनिंग अभ्यास में अमेरिकी सेना ने रूस के साथ काल्पनिक तनाव के दौरान परमाणु बम गिराने का अभ्यास किया था।

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