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“टैरो सिर्फ भविष्य बताने तक सीमित नहीं, संभावित परिस्थितियों को समझने की दिशा भी देता है”

न्यूज़ जर्नलिस्ट अंकित कुमार गोयल

करियर, रिश्ते, भविष्य और जीवन में आने वाली चुनौतियों को लेकर लोगों के मन में कई सवाल होते हैं। ऐसे में टैरो, न्यूमरोलॉजी और हीलिंग जैसी पद्धतियों को लेकर भी लोगों की दिलचस्पी देखने को मिलती है। इन्हीं विषयों पर कॉस्मिक क्लेरिटी की फाउंडर, टैरो कार्ड रीडर और स्पिरिचुअल हीलर श्वेता खिलवानी से खास बातचीत की न्यूज जर्नलिस्ट अंकित कुमार गोयल ने। बातचीत में टैरो, नेगेटिविटी, न्यूमरोलॉजी, करियर, रिश्तों, प्रॉपर्टी, क्रिस्टल हीलिंग और उनके अनुभवों से जुड़े सवालों पर बात हुई।

टैरो आखिर क्या है? क्या यह सिर्फ भविष्य बताता है?

टैरो एक डिवाइन टूल है, जिसके जरिए जीवन की परेशानियों और चुनौतियों को समझने के लिए गाइडेंस ली जाती है। व्यक्ति अपना सवाल पूछता है और कार्ड्स के माध्यम से उस सवाल को समझने की कोशिश की जाती है। टैरो को केवल भविष्य बताने तक सीमित नहीं किया जा सकता। यह पास्ट, प्रेजेंट और फ्यूचर से जुड़े संकेतों के साथ आने वाली परिस्थितियों के लिए तैयारी करने की दिशा भी दे सकता है। इसे ऐसे समझिए—अगर आसमान में बादल हैं और बारिश की संभावना है, तो हम छाता या रेनकोट साथ रख लेते हैं। इसी तरह संभावित परिस्थितियों को समझकर व्यक्ति पहले से तैयार हो सकता है।

नेगेटिविटी या नजर को आम व्यक्ति कैसे पहचान सकता है?

नजर और नकारात्मक ऊर्जा को लेकर लोग अक्सर सवाल करते हैं। भारतीय परिवारों में नजर उतारने जैसी परंपराएं भी लंबे समय से रही हैं। मैं अपने क्लाइंट्स के लिए नेगेटिविटी से जुड़े समाधान के तौर पर नेगेटिविटी रिमूवल स्प्रे, साल्ट्स और मंत्र आधारित प्रक्रियाओं का इस्तेमाल करती हूं। मैं यह भी कहती हूं कि जब तक कोई काम पूरा न हो जाए, अपनी योजनाएं हर व्यक्ति के साथ साझा करने से बचना चाहिए। कई बार लोग ऐसी परिस्थितियों को नजर या टोक लगना कहते हैं।

टैरो और न्यूमरोलॉजी में क्या फर्क है?

मैं सामान्य तौर पर पहले टैरो करती हूं और जरूरत के अनुसार न्यूमरोलॉजी भी देखती हूं। न्यूमरोलॉजी में जन्मतिथि से जुड़े अंकों को महत्वपूर्ण माना जाता है। अलग-अलग नंबरों की अलग-अलग एनर्जी होती है और जन्मतिथि के आधार पर जीवन से जुड़े पहलुओं को समझने की कोशिश की जाती है। कई लोग दोनों की गाइडेंस लेना चाहते हैं, इसलिए दोनों का अपना-अपना रोल है।

क्या टैरो करियर की दिशा समझने में मदद कर सकता है?

जब कोई व्यक्ति यह पूछता है कि उसे बिजनेस करना चाहिए या नौकरी, तो दोनों विकल्पों के लिए अलग-अलग कार्ड्स देखे जाते हैं। इसके बाद कार्ड्स से मिले संकेतों के आधार पर गाइडेंस दी जाती है। हालांकि अंतिम निर्णय व्यक्ति को अपनी परिस्थितियों, रुचि, क्षमता और वास्तविक जानकारी को ध्यान में रखकर लेना चाहिए।

क्या रिश्तों को लेकर भी टैरो से गाइडेंस मिलती है?

हां, रिलेशनशिप से जुड़े बहुत से सवाल आते हैं। लोग पूछते हैं कि पार्टनर वापस आएगा या नहीं, पति-पत्नी के बीच विवाद सुलझेगा या नहीं या रिश्ते में दोबारा जुड़ने की संभावना है या नहीं। ऐसे मामलों में लोग टैरो के माध्यम से अपनी परिस्थितियों को समझने के लिए गाइडेंस लेते हैं।

क्या प्रॉपर्टी से जुड़े लोग भी टैरो की मदद लेते हैं?

मेरे पास प्रॉपर्टी डीलर्स और रियल एस्टेट से जुड़े लोग भी आते हैं। वे किसी प्लॉट या प्रॉपर्टी की एनर्जी या किसी प्रोजेक्ट को लेकर कार्ड्स के संकेत जानना चाहते हैं।

क्रिस्टल हीलिंग में सही क्रिस्टल का चुनाव कैसे होता है?

क्रिस्टल्स को मैं रेमेडीज के रूप में इस्तेमाल करती हूं। मेरा मानना है कि क्रिस्टल को सिर्फ आभूषण की तरह नहीं, बल्कि उसके उद्देश्य को समझकर इस्तेमाल करना चाहिए। मैं क्लाइंट्स को क्रिस्टल को साफ करने, उसे एनर्जाइज करने और gratitude के साथ धारण करने की सलाह देती हूं। व्यक्ति को यह स्पष्ट होना चाहिए कि वह किस उद्देश्य से क्रिस्टल पहन रहा है। उदाहरण के तौर पर कोई व्यक्ति clarity, positivity या focus के उद्देश्य से क्रिस्टल धारण कर सकता है। मेरे अनुसार intention और gratitude इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

आपका कोई ऐसा अनुभव जिसे आप आज तक नहीं भूल पाई हों?

ऐसे कई अनुभव रहे हैं। एक मामले में मेरी एक क्लाइंट के पिता अस्पताल में वेंटिलेटर पर थे। परिवार ने healing के लिए संपर्क किया। हीलिंग के दौरान मुझे एक घर से जुड़े कुछ दृश्य दिखाई दिए, जिनमें पानी, एक खिड़की और पॉलीथिन में रखी किसी चीज का जिक्र था। बाद में परिवार ने घर की परिस्थितियों से कुछ समानताएं बताईं और उन चीजों को हटाया। बाद में उनके पिता की स्थिति में सुधार हुआ। यह मेरे लिए भी एक यादगार अनुभव रहा।

कुछ लोग टैरो को अंधविश्वास मानते हैं। आप इसे कैसे देखती हैं?

लोगों के मन में टैरो को लेकर कई तरह के मिथ और डर हैं। कुछ लोगों को लगता है कि टैरो के जरिए उन्हें डराया जाएगा या अनावश्यक पूजा-पाठ और खर्च बताया जाएगा। मेरे अनुसार टैरो का उद्देश्य व्यक्ति को डराना नहीं, बल्कि गाइडेंस देना है। मैं अपने क्लाइंट्स को छोटी-छोटी रेमेडीज बताती हूं और उन्हें डर में डालना मेरा उद्देश्य नहीं है। टैरो को लेकर लोगों की मान्यताएं अलग-अलग हो सकती हैं। इसलिए इसके बारे में जानकारी लेना और अपनी समझ के आधार पर निर्णय लेना जरूरी है।

अंत में, टैरो या हीलिंग को लेकर डरने वाले लोगों के लिए आपका क्या संदेश है?

मैं यही कहना चाहूंगी कि पूजा-पाठ, टैरो या हीलिंग जैसी चीजों से घबराने की जरूरत नहीं है। अगर किसी व्यक्ति के मन में कोई सवाल या परेशानी है तो वह जानकारी और गाइडेंस ले सकता है। मेरे लिए हम केवल एक माध्यम हैं। मैं मानती हूं कि यूनिवर्सल या कॉस्मिक एनर्जी के जरिए लोगों तक गाइडेंस पहुंचती है। सबसे जरूरी बात यह है कि व्यक्ति डर में न रहे और अपनी समस्याओं को समझने की कोशिश करे। जिंदगी में आने वाली परिस्थितियों का सामना सकारात्मक सोच और सही दिशा के साथ करना चाहिए।

अंतिम बात

टैरो, न्यूमरोलॉजी और हीलिंग को लेकर लोगों की मान्यताएं अलग-अलग हैं। इस बातचीत में इन पद्धतियों से जुड़े अनुभवों, प्रक्रियाओं और उनसे जुड़े सवालों को सामने रखने की कोशिश की गई। बातचीत का उद्देश्य पाठकों को एक टैरो कार्ड रीडर और स्पिरिचुअल हीलर के अनुभव और दृष्टिकोण से परिचित कराना है।

BRIJESH SINGH
the authorBRIJESH SINGH