
(न्यूज़ जर्नलिस्ट अंकित कुमार गोयल)
आपने अपने करियर की शुरुआत कैसे की और परिवार का कितना सहयोग मिला?
इस अवसर के लिए आपको बहुत-बहुत धन्यवाद बड़ा अच्छा प्रश्न आपने किया, हर व्यक्ति की शुरुआत पहले घर से ही होती है। मेरी भी घर से ही शुरुआत हुई और सभी लोगों का सपोर्ट मिलता रहा।
बचपन की प्रेरणा रामपुरा जैसे छोटे गाँव में रहते हुए संगीत का पहला बीज आपके मन में कैसे पड़ा?
जैसा कि मैंने बताया कि परिवार का माहौल बहुत ही अच्छा रहा और बचपन में स्कूल के दिनों से ही मैं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में गाता रहा, गांव में भजन कीर्तन में भी गाता रहा तो इस प्रकार शुरू से ही एक अच्छा माहौल मेरे अपने गांव में और परिवार में मिला।
घर में कौन आपको सबसे ज्यादा सपोर्ट कौन करता था?
संगीत के प्रति सबकी रुचि आज भी बनी हुई है। सबसे ज्यादा सपोर्ट पिताजी और माताजी ने किया।

सारेगामापा 2007 तीसरे राउंड तक पहुंचने के बाद सबसे बड़ी सीख क्या मिली जो आज भी आपके साथ है?
सारेगामापा 2007 का ऑडिशन लखनऊ में हुआ था और उसमें सीखने का मौका मिला जब आप किसी भी कार्य क्षेत्र में आगे बढ़ते हैं तो काम ही आपको सिखलाता है बहुत सारी कमियां रहीं लेकिन फिर भी तीसरे राउंड में पहुंचना यह मेरे लिए बहुत बड़ी बात थी। रेडियो टीवी पर रफी साहब के किशोर कुमार जी के लता मंगेशकर मन्ना डे ऐसे तमाम दिग्गजों को सुन सुन करके मैंने जो कुछ भी सीखा था वह मुझे तीसरे राउंड तक ले गया तो एक बड़ी सीख थी कि किसी भी चीज को निरंतर सुनने जानने और प्रयास करने से उसमें निखार आता है।
मोहम्मद अज़ीज़ साहब ने जब आपके गीतों की सराहना की, उस पल को शब्दों में कैसे बयान करेंगे?
मो० अजीज़ साहब की बातें मेरे लिए किसी सपने से काम नहीं था। पहले तो मुझे विश्वास ही नहीं हो रहा था कि मैं उनके सामने हूं और मैं उनसे बातें कर रहा हूं मैं उनके बहुत सारे गीतों के बारे में उनसे जाना और उन्होंने कहा कि जो भी यहां तक आया है उनमें कुछ खास है तभी यहां तक आया है ।
पूर्णिमा सिंह जी ने कहा था ‘कोयल को ही कूकने का अधिकार नहीं’ — इस बात ने आपकी गायकी की सोच कैसे बदली?
बॉलीवुड की मखमली आवाज पूर्णिमा सिंह जब मेरे सामने आयीं तो मेरी आंखों में पानी आ गया खुशी के मारे, कि जिनको मैं टीवी पर रेडियो पर सुना था वह आज मेरे सामने खड़ी है उन्होंने लाइव एक गीत गाया शाम है धुआं धुआं बहुत ही बेहतरीन जैसे लग रहा था कि मैं रिकॉर्ड सुन रहा हूं उन्होंने यह सीख दिया कि इस दुनियां में कोयल को ही कुकने का अधिकार नहीं है, कोयल के अलावा भी बहुत सारी चिड़ियां हैं जिनके चहचहाने से आंगन गुलजार हो जाता है तो कहने का मतलब यह था की जो भी यहां तक आया है या जो भी यहां कैंडिडेट है जो गा रहा है वह सभी लोग स्पेशल हैं सभी लोग खास हैं और इस संदेश ने मेरे जीवन में परिवर्तन लाया। आप अपने आप से प्रेम कीजिए आप स्वयं के महत्व को समझिए।

इंडियन आइडल के कोलकाता ऑडिशन में अनु मलिक, सलीम और सुनिधि चौहान के सामने रफ़ी साहब का गाना गाते वक्त नर्वस थे या कॉन्फिडेंट?
नर्वस तो बहुत था, क्योंकि कोलकाता संगीत का बहुत बड़ा गढ़ है,1400/1500 लोगों की भीड़ में से फाइनल राउंड तक आना ये मेरे हिम्मत और हौसलें को बनाए रखा। इतने बड़े लोगों के सामने जाने में नर्वस होना एक स्वाभाविक सी बात है।
‘मेरे दुश्मन तू मेरी दोस्ती को तरसे’ ही क्यों चुना? रफ़ी साहब की गायकी का कौन सा पहलू आपको सबसे ज्यादा छूता है?
रफी साहब का यह गाना मैं बचपन से गाता रहा हूं मेरे गांव के विनय चाचा जी जो प्रयागराज में रहते हैं उनको जब यह गीत सुनाता था तो इस गाने में इतनी तड़प है कि वह तड़पकर बेचैन हो जाते थे तो यह गाना बड़ा स्पेशल रहा है, और इस गाने को मैं बचपन से गाता आ रहा हूं। इसलिए इस गाने के प्रति मेरा लगाव अधिक है । रफी साहब के पहलुओं के बारे में बात करने की काबिलियत मेरे अंदर नहीं है, फिर भी अगर बात करें तो उनका मस्ती भरा गाना उनका भजन उनकी कव्वाली उनके रोमांटिक गीत दर्द भरे गीत सभी मुझे बड़े ही अच्छे लगते हैं। जहां तक मुझे लगता है रफी साहब के गीत जो सरल होते हैं वह सरल नहीं होते हैं और कठिन से कठिन गीत भी सरल लगते हैं, पर होते नहीं है, यह बड़ा हास्य पद है लेकिन मैं ऐसा महसूस करता हूं।
अधूरी फिल्म ‘बदला भ्रष्टाचार के’ रिलीज़ नहीं हो पाई — एक कलाकार के तौर पर अधूरे प्रोजेक्ट का दर्द कैसे हैंडल करते हैं?
एक प्रोजेक्ट मिला था। प्रोजेक्ट मिलने की अपनी एक खुशी होती है। आदमी किसी उम्मीद से काम करता है, और अभी अभी तो स्टार्टिंग ही थी मेरी, मुझे हायर किया गया था गाने के लिए और उसमें दो गाने थे लेकिन किसी कारणवश वह फिल्म रिलीज नहीं हो पाई उसके गीत मेरे पास रिकॉर्ड है सुन के आनंद आता है।

गोरखपुर सुर संग्राम 2010 में दूसरा स्थान मिला। हार और जीत के बीच का फासला आपको क्या सिखा गया?
जी, गोरखपुर सुर संग्राम 2010 में अच्छा अनुभव रहा और मेरे गृह जनपद का कार्यक्रम था एसएमएस के माध्यम से वोटिंग थी मैं ग्रामीण क्षेत्र से था मुझे कम लोग जानते थे। रही बात हार और जीत की तो संगीत के क्षेत्र में हार जीत का कोई मतलब नहीं होता है। संगीत चलते रहने का नाम है। जो ठहर गया वह हार गया।

एमए-बीएड करने के बाद भी संगीत के प्रति इतना लगाव तथा अकादमिक करियर और स्टेज के बीच कभी द्वंद्व हुआ?
एकेडमिक करियर और स्टेज के बीच कभी ऐसा द्वंद नहीं हुआ जहां भी अवसर मिला वहां अच्छा काम करने का अनुभव रहा।
शिक्षा व्यक्ति के जीवन में निखार लाता है आप कोई भी कार्य क्षेत्र चुनिए आप बेहतर करेंगे, और आपको उस कार्य क्षेत्र में प्रसिद्धी मिलेगी।
अब भक्ति संगीत की तरफ रुझान क्यों? आने वाले 2 साल में खुद को किस मंच पर देखना चाहते हैं?
मनुष्य को अपने ईष्ट मे आस्था रखनी चाहिए। आशावादी व्यक्ति जीवन में सब कुछ प्राप्त कर सकता है। शरणागति से ही जीवन का उद्धार होगा(प्रभु हम भी शरणागत हैं स्वीकार करो तो जाने) यह भावना होनी चाहिए। आगे आने वाले दिनों में क्या होगा ऐसा कह नहीं सकते हैं। बस इतना ही कह सकते हैं जहां नाथ रख दोगे वही मैं रहूंगा जहां ले चलोगे वहीं मैं चलूंगा।
बहुत-बहुत धन्यवाद!




