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शहीद कर्नल चाहर को सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई, भारत भक्ति फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. ब्रजेश कुंतल ने दी श्रद्धांजलि

लेफ्टिनेंट कर्नल दीवान सिंह चाहर को आज पूरे सैन्य एवं राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता एवं भारत भक्ति फाउंडेशन / दीनदयाल शिक्षण एवं शोध संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ. ब्रिजेश कुंतल ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके अदम्य साहस और देशभक्ति को नमन किया।

तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर को देख नम हुईं आंखें

कर्नल चाहर पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थे और 15 अप्रैल की रात्रि को उन्होंने अस्पताल में अंतिम सांस ली। आज उनका पार्थिव शरीर दिल्ली स्थित उनके आवास लाया गया, जहां आमजन, परिजन और सेना के अधिकारियों ने अंतिम दर्शन किए। तत्पश्चात दिल्ली कैंट में सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ।

गार्ड ऑफ ऑनर के साथ दी गई अंतिम सलामी

अंतिम संस्कार के दौरान सेना के जवानों एवं अधिकारियों ने अनुशासित सलामी देकर अपने वीर अधिकारी को अंतिम विदाई दी। इस मार्मिक क्षण ने उपस्थित सभी लोगों की आंखें नम कर दीं। हर चेहरे पर गर्व और शोक का मिश्रित भाव स्पष्ट दिखाई दे रहा था।

डॉ. ब्रजेश कुंतल ने कहा – ‘बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा’

डॉ. ब्रिजेश कुंतल, जिनका कर्नल चाहर के परिवार से घनिष्ठ पारिवारिक संबंध रहा है, ने पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा, “कर्नल चाहर जैसे वीर सपूतों का बलिदान देश के लिए प्रेरणा स्रोत है। मातृभूमि की रक्षा हेतु दिया गया उनका सर्वोच्च बलिदान सदैव स्मरणीय रहेगा। हमें उनके आदर्शों पर चलकर उनके बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने देना है

डॉ. ब्रिजेश कुंतल ने कर्नल चाहर के सुपुत्र रविदीप चाहर जो कि पुदुचेरी सर्विसेज ( 2000 बैच ) के अफसर हैं। उनके कर्तव्यनिष्ठ जीवन का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने अपने दायित्वों के साथ-साथ पुत्र धर्म निभाते हुए अपने पिता की सेवा कर युवाओं के लिए आदर्श प्रस्तुत किया है।

ज्ञात हो कि डॉ. कुंतल 30 वर्ष से आरएसएस के अनुशासित कार्यकर्ता के नाते समाज कार्य कर रहे हैं । आपके पूर्वज भी महाराजा सूरजमल के सैन्य अधिकारी रहे थे व मेवात को मुगल शासकों से आजाद करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। बहादुरी से प्रसन्न होकर महाराजा भरतपुर ने बरसाना के समीप अरावली के पहाड़ियों के समीप 1000 बीघा जमीन पुरस्कार स्वरुप कुंतल जी के परिवार को दी।

डॉ. कुंतल की रगों में भी राष्ट्र प्रेम कूट-कूट कर भरा है। बाल्यकाल से स्वयंसेवक डॉ. ब्रिजेश कुंतल पांडववंशी हैं व परिवार में कई सेना अधिकारी आज भी राष्ट्र की सेवा में लगे हैं। सैन्य अधिकारी की अंतिम विदाई में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। आसपास के क्षेत्रों से आए लोगों ने भी अपने प्रिय वीर को अंतिम श्रद्धांजलि दी। बुजुर्गों की आंखें नम थीं, वहीं युवाओं में देशभक्ति और सम्मान की भावना स्पष्ट झलक रही थी।

उल्लेखनीय है कि कर्नल चाहर जाट महासभा, आगरा से भी जुड़े रहे और सेवानिवृत्ति के बाद समाजसेवा में सक्रिय भूमिका निभाते हुए अनेक युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान किए। उनका जीवन और बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।

 

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BRIJESH SINGH
the authorBRIJESH SINGH